Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप आज के समय के घातक रोगों में से एक है। रक्तचाप की दर व्यक्ति की आयु , शरीरिक एवं मानसिक कार्यशीलता , परिवारिक पृष्ठभूमि तथा उसके खानपान पर निर्भर करती है।

एक स्वस्थ मनुष्य में रक्तचाप की दर 80 मि मी डायस्टोलिक और 120 मि मी सिस्टोलिक होती है।


उच्च रक्तचाप के कारण :-

अनुचित खान पान अत्यंत गरिष्ठ भोजन का सेवन तथा शारीरिक व्यायाम की कमी उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण है:-

फ़ास्ट फूड

फसलो के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले कीटनाशक

Preservatives

इन सब कारणों से शरीर मे जीवविष प्रविष्ठ होते है। जो कि पाचन क्रिया पर प्रादुर्भाव डालते हैं।

पाचन क्रिया के मन्द पड़ने से भोजन में “आम” Acidic Toxin उत्पन्न होता है जो रक्त में प्लाज्मा से संयुक्त हो कर “साम” Blood Toxin का निर्माण कर देता है।

साम सामान्य रक्त से अधिक घनिष्ठ और भारी होता है। जिस कारण ये रक्तवाहिनियों के कमजोर हिस्सों में जाकर जम जाता है। इस कारण रक्त धमनियों की चौड़ाई कम हो जाती है। और रक्त को स्रोतों में वहन करने में अवरोध आता है और इस कारण धमनियों में अधिक दबाव या ब्लड प्रेशर का निर्माण हो जाता है।

मॉडर्न मेडिकल साइंस अब इस बात को स्वीकार रहा है कि रक्तचाप, ह्दय सम्बन्धी बीमारियों का कारण है। चीनी और वेजिटेबल आईल्स के उपयोग से उत्पन्न धमनियों में जलन और शुष्कता इसका जड़ है

यह अन्य बीमारी, मानसिक तनाव, चिंताग्रस्त रहने से, अधिक सोचने से भी रक्तचाप की दर सामान्य से बढ़ जाती है, बहुत अधिक तला हुआ गरिष्ठ भोजन खाना, चाय कॉफी का अधिक सेवन, Procecced फूड भी रक्तचाप को बढ़ाने के कारण है।

उच्च रक्तचाप के लक्षण :-

उच्च रक्तचाप को “SILENT KILLER” भी कहा जाता है। इस रोग के लक्षणों की सही पहचान करना अत्यंत आवश्यक है।और इसका उपचार हर्बल मेडिसिन से सम्भव है।


“गर्दन के पीछे के हिस्से में दर्द, घबराहट और कपकपी महसूस होना, चक्कर आना और बिना काम किए थकान का रहना, उच्च रक्तचाप के प्रमुख लक्षण हैं। उच्च रक्तचाप तीनो दोषो की विकृति ह्रदय तथा रक्त धमनियां में उत्पन्न विकार से होता है। रक्त धमनियों में वमान वायु की गड़बड़ी के लक्षण पाए जाते हैं।”


जीवनशैली और खान पान सम्बन्धित सुझाव :-


1 मांस, अंडे, नमक, आचार, चाय, कॉफी का प्रयोग निम्न मात्रा में करना चाहिए।


2 धूम्रपान और शराब का सेवन नही करना चाहिए।


3 प्रोटीन और वसा युक्त भोजन का सेवन कम से कम करना और सब्जी फल आदि की मात्रा भोजन में बढ़ाना हितकर है।


4 लहसुन, आंवला, निम्बू, चकोतरा, मौसंबी, तरबूज, बिना मलाई का दूध का प्रयोग करने से रोगी को लाभ मिलता है।


5 भोजन हल्का और सुपाच्य होना चाहिए।


6 किसी एक विशिष्ट पद्धति द्वारा किए जाने वाला व्यायाम जैसे जॉगिंग, तैरना या फुर्ती से की गई नियमित सैर को भी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

जटिल एवं आसाध्य रोगों का वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति द्वारा आसान समाधान।

सम्पर्क :- अनमोल हेल्थ केयर

डॉ हलधर पटेल & समूह
9098472777

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