Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

मत्स्यासन क्या है?

मत्स्यासन संस्कृत शब्द मत्स्य से निकला है जिसका अर्थ होता है मछली। मत्स्यासन योग पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला आसन है।

इसमें शरीर का आकार मछली जैसा प्रतीत होता है इसलिए इसको Fish Yoga Pose के नाम से भी जाना जाता है। अगर इसको सही विधि के साथ किया जाए इसके स्वस्थ लाभ अनेक हैं।

मत्स्यासन योग कैसे करें ?

1. साधक सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं।


2.धीरे-धीरे पीछे झुकें और पूरी तरह पीठ पर लेट जाएं।


3.बाएं पांव को दाएं हाथ से पकड़े और दाएं पांव को बाएं हाथ से पकड़ें।


4.कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दें।


5.घुटने जमीन से सटे होनी चाहिए


6.अब आप सांस लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर लेकर जाएं।


7.या हाथ के सहायता से भी आप अपने सिर को पीछे गर्दन की ओर कर सकते हैं।


8.धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।


9.इस अवस्था को अपने हिसाब से मेन्टेन करें।


10.फिर लंबा सांस छोड़ते हुए अपने आरम्भिक अवस्था में आएं।


11.यह एक चक्र हुआ।


12.इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।


मत्स्यासन योग के लाभ :-

मत्स्यासन पेट की चर्बी के लिए:

इस आसन के अभ्यास से आप पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं। लेकिन पेट की चर्बी कम करने के लिए इस आसन को बहुत देर तक धारण करनी की जरुरत है ताकि पेट में खिंचाव आये। और साथ ही साथ यह भी जरूरी है की इस आसन को कुछ महीनों तक करते रहा जाए।


2.थाइरोइड का इलाज मत्स्यासन से:

थाइरोइड के इलाज के लिए मत्स्यासन रामबाण का काम करता है। इस आसन से गर्दन वाले हिस्से में पाए जाने वाले थाइरोइड और पारा थाइरोइड का अच्छी तरह से मालिश हो जाता है जिससे थायरोक्सिन हॉर्मोन के स्राव में मदद मिलती है। यही थायरोक्सिन हॉर्मोन थाइरोइड के इलाज के लिए एक अहम भूमिका निभाता है।


3.मत्स्यासन कब्ज के लिए:

यह आसन पेट की मालिश करता है तथा कब्ज के उपचार में लाभदायक है।


4.फेफड़े रोगों के लिए मत्स्यासन:

इस आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी होती है जी फेफड़ों एवं सांस के रोगों में लाभकारी है।


5.रीढ़ लचीला के लिए मत्स्यासन:

यह पीठ के ऊपरी हिस्से की पेशियों को आराम देता है तथा रीढ़ को लचीला बनाता है।


6.घुटने के दर्द के लिए मत्स्यासन:

घुटनों तथा पीठ के दर्द में यह उपयोगी है।


7.यौन विकारों से बचाए मत्स्यासन:

विभिन्न प्रकार के यौन विकारों से बचने में यह महिलाओं की सहायता करता है।


8.गर्भाशय की समस्याओं के लिए मत्स्यासन:

यह गर्भाशय की समस्याओं में महिलाओं के लिए यह उत्तम आसन है।


9.मधुमेह के लिए मत्स्यासन:

यह पैंक्रियास का मालिश करता है और इन्सुलिन के स्राव में मददगार है।


10.कमर दर्द के लिए मत्स्यासन:

यह आपके रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और कमर दर्द से आपको निजात दिलाता है।

मत्स्यासन की सावधानी :-


1.पेप्टिक अल्सर में इस आसन को करने से बचना चाहिए।


2.हर्निया वालों को यह आसन नहीं करनी चाहिए।


3.रीढ़ के किसी गंभीर रोग से ग्रस्त व्यक्तियों यह आसन नहीं करनी चाहिए।


4.अगर घुटने में ज़्यादा दर्द हो तो इस आसन को करने से बचें।

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