Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

अमाशय के घाव (gastric ulcer .)

परिचय —— इसे अमाशय का ulcer of stomach भी कहते हैं. यह एक प्रकार का अमाशय का घाव है जो आमाशय की अल्पवक्रता (lesser curvature) या पिछली दीवार पर अथवा जठर निर्गम कोटा (pyloric ,antrum) पर उत्पन्न होता है और पेट में हल्का हल्का दर्द रहता है जो खाना खाने के आधा घंटा बाद बढ़ जाया करता है आहार नाल की गुदा की सतह के एसिड पेप्सिन के संपर्क में अधिक रहने से यह सतह जगह-जगह से टूट जाती है या इसमें छेद हो जाते हैं यह मुख्यतः अमाशय तथा ग्रहणी में होते हैं अथवा आहार नाल के किसी भाग में भी हो सकता है इन्हीं अल्सर कहते हैं .

मुख्य कारण — आमाशय शोध , भ्रम ,अति कार्य करना ,चिंता व अनियमित आहार, खाली पेट, अति धूम्रपान करना बार-बार पतली दस्त व पेचिश की शिकायत बने रहना एस्प्रिन अथवा एपीसी आदि अंग्रेजी दवाई का अधिक उपयोग विटामिन सी की कमी आघात विषम पायरिया आदि का आदि कारण हो सकते हैं .

लक्षण ———- रोगी को लंबे समय तक अजीर्ण रोग की शिकायत, पेट में हल्की हल्की दर्द बने रहना ,और खाना खाने के बाद और ज्यादा बढ़ जाना भोजन के उल्टी द्वारा निकल जाना ,पेट ,कंठ और छाती में जलन होना, प्रायः यह युवावस्था में 25 साल से 40 साल की आयु में लगभग ज्यादा देखने को मिलता है भोजन से पीड़ा की वृद्धि के कारण रोगी भोजन करने से डरता है और दुर्बल हो जाता है .

परिणाम .—— वर्ण के चारों ओर फाइब्रोसिस की वृद्धि हो हो जाती है जिसके कारण आमाशय दो भाग में विभाजित हो जाता है जिससे घाव पर ट्यूमर हो सकती है इसका उपचार नहीं कराने से आगे जाकर यह कैंसर हो सकता है जिससे मरीज की मृत्यु हो सकती है .

परहेज—- अधिक मिर्च ,मसाला, बीड़ी ,सिगरेट, तंबाकू ,शराब , कॉफी आदित्य से बचना चाहिए .

चिकित्सा –_——हर्बल मेडिसिन से इसका उपचार बहुत ही सरल व सुंदर ढंग से ठीक हो जाता है दवाई कुछ माह स्टेप बाय स्टेप चलाना पड़ता है और बार-बार होने वाली परेशानी से निजात मिल जाती है .

डॉ डी के साहू
धर्मार्थ सूरज क्लीनिक$ कर्मा इलेक्ट्रो होम्यो चिकित्सा केंद्र….

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