Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

लकवा

लकवा (पैरालिसिस ) एक या अधिक मांसपेशियों को संचालित करने की क्षमता की हानि को कहते हैं। जिसके कारण अनुभव करने में और अन्य शारिरिक कार्यो में भी अक्षमता उत्पन्न होती है।

लकवे के अनेक प्रकार हैं जिनमे :-
मोनोप्लेजिया :- जिसमे केवल एक अंग ही लकवा ग्रस्त होता है।


हेमिप्लेजिया :- शरीर के किसी एक तरफ के हाथ और पैर दोनों लकवा ग्रस्त हो जाते है।


पैराप्लेजिया :- जब दोनों पैर और कभी कभी कमर के नीचे का क्षेत्र भी लकवाग्रस्त हो जाता है।


टेट्राप्लेजिया :- जब दोनों हाथ और पैर लकवाग्रस्त हो जाते हैं।


रोग अवधि :- लकवा ठीक होना इस बात पर निर्भर करता है कि उत्पन्न होने का कारण क्या है और तंत्रिका तंत्र को कितनी क्षति हुई है।


जांच और परीक्षण :- रोगी की चिकित्सकीय स्थिति जानने हेतु शारीरिक परीक्षण जिनमे :-
1 आघातों के प्रकरण ।
2 विषैले तत्वों का प्रभाव ।
3 निकट समय मे हुई शल्यक्रिया या संक्रमण ।
4 सिर दर्द ।
5 पहले से उत्पन्न मेटाबोलिक रोग और पारिवारिक इतिहास।
6 तंत्रिकाओं से सम्बंधित अन्य स्थितियां।


लक्षण :-
1 अनुभव करने , गति करने , मूत्र पर नियंत्रण और मलत्याग पर नियंत्रण की शक्ति की हानि।
2 मांसपेशियों का सख्त होना , झुनझुनी और सनसनाहट एवं दर्द।
3 दिखाई देने में अवरोध , बोलने में कठिनाई।
4 कब्ज अथवा दस्त ।
5 मूत्राशय और जननांगों का अपना कार्य ना कर पाना।
6 त्वचा पर निशान , श्रवण शक्ति की कमी।


कारण :- लकवा अधिकतर तंत्रिका तंत्र को क्षति उत्पन्न होने से होता है। विशेषकर मेरुदंड को क्षति होने से , अन्य प्रमुख कारणों में स्ट्रोक , ट्यूमर और आघात लगना(गिरने या टकराने से) है।
2 मल्टीपल स्क्लेरोसिस(एक रोग जो तंत्रिका कोशिकाओं की सुरक्षा परत को नष्ट कर देता है।)
3 सेरिब्रल पाल्सी (मस्तिष्क की बनावट में विकृति या उससे लगी चोट से उत्पन्न स्थिति )
4 मेटाबोलिक विकार (इसमें शरीर की स्वयं को संतुलित रखने की क्षमता में अवरोध होता है।)
5 स्पांडिलाइटिस (मेरुदण्ड की मांसपेशियों में जकड़न)
6 रूमेटॉयड अर्थराइटिस (वातरोग)
7 विष अथवा विषैले तत्व ।
8 विकिरण।

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सम्पर्क :- “अनमोल हेल्थ केयर “
“डॉ हलधर पटेल”
9098472777

“अपने संपर्क में जरूर साझा करें धन्यवाद।”

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