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साइनोसाइटिस

साइनस एक तरह से शरीर की खोपड़ी में जमा हवा वाली खाली जगह है। जिसे Sinus Cavity से जाना जाता है। साइनस प्रणाली नाक से ली गई सांस हवा को नमी बनाने और सिर को हल्का करने का कार्य करती है। साइनस प्रणाली सिर के माथे , सिर के पीछे, आखों के पिछले नीचे भाग , गले के पिछले भाग में होती है।

साइनस प्रणाली का ग्रसित विकार होने का मुख्य कारण संक्रमण, एवं ठंडी ऐसी हवा, ठंडी बर्फीले चीजें सेवन, धूम्रपान, कैमिकल, तेज दुर्गन्ध गैस है और नाक सांस नली , वाहिकाओं में रूकावट के कारण श्लेष्मा झिल्ली जमना शुरू हो जाता है। नाक बंद, नाक से सांस लेने में रुकावट, सिर दर्द , माथे पर दर्द, सर्दी लगातार रहना , नाक छिद्रों से नाक में पीला , हरा कफ जमना, ज्वर रहना, सूंघने पर गंध महसूस न होना, त्वचा का रंग बदल जाना जैसे मिले जुले लक्षणों को साइनुसाइटिस बीमारी कहा जाता है।

साइनस खास तौर पर दो तरह से होती है। एक साधारण साइनस विकार और दूसरा गम्भीर साइनस।
साधारण साइनस में शुरुआती स्थिति में नाक में कफ जमना , सांस लेने में दिक्कत होना आदि लक्षण होते हैं और दूसरी गम्भीर साइनस स्थिति में नाक नली , वाहिकाएं बन्द हो कर माथे , आँखों के निचले हिस्से में सूजन दर्द के साथ गम्भीर रोग आरंभ हो जाता है

साइनस संक्रमण के पीछे व्यक्ति का खान पान दिनचर्या काफी हद तक जिम्मेदार है। संतुलित पौष्टिक भोजन , योगा, व्यायाम, स्वस्थ और निरोग शरीर के लिए जरूरी है। साइनस संक्रमण से भारत मे लगभग एक चौथाई लोग ग्रसित हैं।

साइनोसाइटिस के लक्षण:-


1 लगातार नाक बंद।
2 नाक से सांस लेने में रुकावट होना ।
3 सिर दर्द रहना।
4 माथे पर दर्द रहना।
5 नाक छिद्रों से नाक में पीला, सफेद, हरा कफ जमना और निकलना।


6 माथे , आँखों के निचले भाग , गले में सूजन रहना।
7 सर्दी जुकाम लम्बे समय तक लगातार रहना।
8 हल्का ज्वर रहना।
9 सूंघने पर खुशबु , गन्ध महसुस नहीं होना।
10 त्वचा का रंग बदलना।
11 दांतों मसूड़ों में हल्का दर्द जकड़न महसूस करना।

साइनस लक्षण जांच:-


साइनस लक्षण लगने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह उपचार करवाये। साइनस की सही स्थिति का पता सिर चेहरा एक्सरे , सी टी स्कैन , एम आर आई जांच, नाड़ी जांच, Frequency जांच ( QRMA And HEALY TEST ) प्रकिया से आसानी से पता चल जाता है।

उपचार :- इलेक्ट्रोपैथी मेडिसिन के द्वारा सम्भव है

संपर्क –
डॉ हलधर पटेल
संतोषी नगर, रिंग रोड न.1 रायपुर
9098472777

: गुड़ खाने से 18 फायदे, अगर देशी हो तो अत्युत्तम
(1)- गैस की दिक्कत नहीं होती।

(2)- खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं।
इसलिए हेल्दी रहने के लिये गुड़ खाएं।

(3)- पाचन क्रिया को सही रखना।

(4)- शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है।
रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती।
गैस की परेशानी से बचने के लिये रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं।

(5)- आयरन का मुख्य स्रोत है। एनीमिया के मरीज़ों के लिए फायदेमंद है।
खासतौर पर महिलाओं के
लिए बहुत ज़रुर है।

(6)- त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती।

(7)- गुड़ की तासीर गर्म है,
इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है।
जुकाम के दौरान अगर कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल करें।

(8)- एनर्जी के लिए-
बहुत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है।
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।

(9)- शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है।
इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के लिए इसका सेवन फायदेमंद होता है।

(10)- जोड़ों के दर्द में आराम-
रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के
साथ अदरक का सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी।

(11)- गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।

(12)- गुड़ और काले तिल के लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है।

(13)- जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं।

(14)- गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

(15)- भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती।

(16)- पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

(17)- गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।

(18)- पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।

जटिल एवं असाध्य रोगों( पुरानी बीमारियों) का वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति द्वारा उपचार

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डॉ हलधर पटेल
संतोषी नगर, रिंग रोड न.1 रायपुर
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COMMON NAME – GOOSE FOOT / JENESELAM

FAMILY NAME – CHENOPODIACEAE

HINDI NAME – बथुआ ।

AVAILABILITY

CHHATISGARH  IN INDIA

ITALY

RUSSIA

AMERICA

JAPAN

PROPERTIES

PERIPHERAL BONE



CENTRAL FRECTURE



PAIN OF BONE DUE TO LAKE OF CALCIUM



PARALYSIS



WORM INFESTATION



COUNTINOUS MILD FEVER


DEAFNESS DUE TO NERVOUS PROBLEM




INFLAMMATION OF SUBMAXILLARY SKIN



TONSILITIS



LEUCORRHEA



HEMIPLEGIA

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स्वेत प्रदर (leukorrhoea ) . .

परिचय —–गर्भाशय नलिका अथवा योनि से सफेद या पीलापन लिया हुआ चिपचिपा श्राव का निकलना श्वेत श्वेत प्रदर कहलाता है योनि से सफेद पानी जाना स्त्रियों का प्रमेह रोग है यह महिलाओं में होने वाले काफी संक्रमित रोग हैं..

कारण ——-1.कुछ परजीवी का आक्रमण अथवा प्रकोप इन्फेक्शन मुख्य कारण है जैसे ट्राईकोमोनल तथा मनोलियल तथा सुजाक अथवा सिफलिस..

2. दूसरा सामान्य कारण प्रजनन अंगों की अस्वक्षता

3. कुपोषण व अल्प पोषण

4. अंतः स्रावी ग्रंथियों की कार्यप्रणाली असंगति होना

5. शरीरिक सक्रियता का अभाव जैसे बेमेल विवाह जीवन का सामंजस्य न हो पाना

6 .चिंता भय क्रोध तनाव मानसिक रोगों के कारण भी हो सकती है

7 . रितु स्राव में अनियमितता जल्दी-जल्दी प्रसव व गर्भपात अत्यधिक मैथुन आघात कृतिम गर्भ निरोधक उपाय

मासिक धर्म का ना आना क्या कहलाता है, इसके कारण ऐसी परेशानियां होती हैं पूरी जानकारी के लिए क्लिक करें

8. श्वास रोग श्वास रोग, रक्त दोष ,चर्म रोग, संधि वाद जॉन्डिस व कृमि रोग भी इसका कारण हो सकता है

9. बालिकाओं में श्वेत प्रदर प्राया योनि में प्रवेश हो जाने वाली सूत्र क्रीमी गंदगी ठंडी चीज अत्यधिक सेवन से अधिक सेवन ठंडी जगह रहने आदि कारण हो सकता है

लक्षण

1.-रोग के प्रारंभ में स्त्री को शारीरिक कम जोरी का अनुभूति होती है

2. शरीर में खून की कमी बार बार चक्कर आना

3.आंखों के सामने अंधेरा छा जाना

4 .भूख न लगना

5. शौच साफ ना होना बार-बार पेशाब होना पेट खाली पर लगना व दर्द होना

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7 . जांघों में भारीपन एवं उनकी में खिंचाव शर्म महसूस होना

8 . श्वास कष्ट एवं मुरझा हो जाना

9 .योनि में खुजली और लाल, पीला द्रव निकलने लगता है

10. स्त्री की चेहरा दिन प्रतिदिन पीला सा पड़ने लगता है

11. कमर और पिंडलियों में दर्द रहने लगता है लुकोरिया आमतौर पर तीन प्रकार की होती है-

1. मोनी लिया लुकोरिया यह योनि से निकलने वाला पानी सफेद दही के समान गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ होती हैं तथा योनि के आसपास खुजली होती हैं

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2. ट्रोको मानस लुकोरिया इसमें निकलने वाले पानी पतला व पीले रंग का होता है साथ ही खुजली भी होती है

3 सुजाक के कारण होने वाली लुकोरिया में योनि से निकलने वाला पानी पस और बदबूदार होती हैं तथा पेशाब करते समय जलन की अनुभूति होती है

रोग की पहचान — पहचान के लिए ब्लड टेस्ट ,यूरिन टेस्ट, स्टूल, वा वीडीआरएल की जांच की आवश्यकता हो सकती है

परिणाम ——1.समय पर उपचार करने से आसानी से ठीक हो जाती हैं 2 .इसका समय पर उपचार न होने से कई बार यह बच्चेदानी में इंफेक्शन बढ़ जाती है जिसके कारण बच्चेदानी सूजन हो जाते हैं और सूजन होने के पश्चात इसमे छाले हो जाता है और बाद में डॉ बच्चेदानी को निकालने के लिए बोलते हैं और नहीं निकालने से दो-तीन साल बाद या कैंसर का रूप धारण कर लेता है जोकि बहुत भयंकर हो सकता है

चिकित्सा—– हमारे यहां e h harbal medicine से इस तरह की केस बहुत लोगों ठीक हुए हैं और अभी भी कुछ लोगों के उपचार जारी हैं …

परहेज —- ज्यादा तेल ,मसाला, खट्टा ,मैदा, ठंडी चीज का उपयोग नहीं करनी चाहिए

डॉ डी के साहू
कर्मा इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा केंद्र

खमतराई, रायपुर

  1. CHAMOMILLA

COMMON NAME –

MATRICARIA CHAMOMILLA

FAMILY NAME –

COMPOSITAE

HINDI NAME –

बाबून।

AVAILABILITY

INDIA

AUSTRALIA

EUROPE

PROPERTIES

DIGESTIVE PROBLEM

ULCER

NOUSEA

VOMITING

PORTAL PAIN

HEPATITIS

ASCITES

DENTITION OF INFANT

एडिसन रोग

एडिसन रोग एक प्रकार का विकार होता है। यह विकार तब होता है जब आपका शरीर एड्रिनल ग्रन्थियों द्वारा बनाए जाने वाले कुछ विशेष हॉमोर्न का अपर्याप्त मात्रा में उत्पादन करने लगता है ।

एडिसन रोग में आपकी एड्रिनल ग्रन्थि बहुत ही कम मात्रा में “कोर्टीसोल” बना पाती है। अक्सर एड्रिनल ग्रन्थि एल्डोस्टेरोन को भी आप्रयाप्त मात्रा में उत्पादन करती है। एडिसन रोग को “एड्रिनल इंसाफिसिएसी ” भी कहा जाता है।

इस टेस्ट के माध्यम से आप अपनी समस्या की पूरी जानकारी ले सकते हैं

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यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है और दोनों प्रकार के लिंग को प्रभावित करता है। एड्रिनल रोग जीवन के लिए हानिकारक समस्या बन सकता है –

एडिसन रोग के लक्षण में शामिल हैं –

1 थकान ।

2 मतली ।

3 त्वचा का रंग काला पड़ना।

4 चक्कर आना।

5 मांस पेशी में कमजोरी।

6 बुखार ।

7 वजन घटना।

8 चिंता।

9 जी मचलाना।

10 उल्टी।

11 सर दर्द ।

12 जोड़ों का दर्द ।

एडिसन रोग के अन्य कारण :-

1 अधिवृक्क ग्रन्थियों में कैंसर ।

2 सर्जरी के माध्यम से अधिवृक्क ग्रन्थियों को हटाने।

3 असामान्य अधिवृक्क ग्रन्थि विकास।

4 एंटीफंगल दवाएं ।

एडिसन रोग के सामान्य कारण :-

1 यक्ष्मा।

2 स्वतः प्रतिरक्षा विकार।

3 असामान्य अधिवृक्क ग्रन्थि विकास।

एडिसन रोग के जोखिम कारक :-

ह्रदय रोगों का इतिहास

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अनमोल हेल्थ केयर छत्तीसगढ़

डॉ हलधर पटेल

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Amenorrhoea (मसिक धर्म का न आना)


Introduction परिचय –

amenorrhoea अर्थात menses का न आना या कम आना amenorrhoea कहलाता है।

प्रत्येक माह 28 दिन में menses का आना और 3 से 5 दिन का menses का होना स्वास्थ की निशानी है। भारतवर्ष में महिलाओं को menses 12- 13 वर्ष से प्रारंभ होकर 40 से 45 वर्ष उम्र तक menses होता है।

यह सामान्य स्वास्थ की निशानी है। menses का न होना amenorrhoea कहलाता है।


Types of Amenorrhoea

physiological

12 वर्ष से पहले menses होता ही नहीं

pregnency के समय menses नहीं होता।

बच्चों को दूध पिलाने वाली माता को menses नहीं होता

menopous 45 वर्ष के बाद menses नहीं होता


pathological

primary amenorrhoea –

युवावस्था से प्रारंभ होने के बाद भी menses का न आना यह निम्न कारणों से होता है-

Reproductive organ का विकास न होना

pituitary gland का secration कम होना तथा बच्चे का विकास ठीक से न होना।

युवावस्था देर से होना

mental debility


Secondary amenorrhoea-

menses का एक बार कम से कम आना बाद में नहीं आना secondory amenorrhoea कहलाता है।

reproductive organ में obstruction


hystractomy


ovary का rediation


pituitory gland की परेशानी thyroid problems


diabatic


कुपोषण


obesity मोटापा


tuberculosis


Diagnosis-

menses का लक्षण के आधार पर तथा QRMA टेस्ट द्वारा करते हैं।


Management

physical work


योग


balance deit

चिकित्सक से मिलने की जानकारी -👇

डॉ राधिका, अनमोल हेल्थ केयर संतोषी नगर होटल सुकून के पास, रायपुर

प्रत्येक महीने की 2 तारीख को अनमोल हेल्थ केयर सारँगढ़ ब्रांच में सुबह 11 से शाम 6 बजे तक

मैनिंजाइटिस

मैनिंजाइटिस यानी दिमागी बुखार संक्रमण रोग है जो सबसे ज्यादा छोटे बच्चों को होता है। ये एक खतरनाक रोग माना जाता है। क्योंकि कई बार मैनिंजाइटिस के इलाज में घण्टेभर की देर भी जानलेवा हो सकती है और कई बार ठीक ना हो जाता है लेकिन दुष्प्रभाव जिंदगी भर रहते है।


ये आस – पास तरल पदार्थों से घिरा रहता है और इसी तरल पदार्थ में ये संक्रमण पैदा करते है । जिस वजह से इंसान को दिमागी बुखार आ जाता है। मैनिंजाइटिस का खतरा सबसे अधिक छोटे बच्चों को होता है जबकि संक्रमण मैनिंजाइटिस का खतरा युवाओं को होता है।

आमतौर पर इसे मस्तिष्क का कारण की सूजन के रूप में भी जाना जाता है।
मैनिंजाइटिस के शुरुआती लक्षण सामान हो सकते हैं आमतौर पर संक्रमण मैनिंजाइटिस के लक्षण अधिक गम्भीर होते है। आयु के आधार पर इसके लक्षणों में भिन्नता पाई जा सकती है।

मैनिंजाइटिस के प्रकारों के आधार पर इसके लक्षण निम्न हैं :-

भूख में कमी।

चिड़चिड़ापन ।

आलस्य।

बुखार ।

सिर दर्द ।

गर्दन में अकड़न ।

चमकीले प्रकाश के प्रति संवेदन शीलता ।

सुस्ती ।

संक्रमण मैनिंजाइटिस के लक्षण :-

संक्रमण मैनिंजाइटिस के अचानक से अचानक विकसित होते है :-

चिड़चिड़ापन।

सिर दर्द होना ।

बुखार आना ।

ठंड लगाना।

गर्दन में अकड़न ।

त्वचा पर बैगनी धब्बे जो चोट के समान दिखाई देते हैं

मानसिक स्थिति में बदलाव आना।

प्रकाश की संवेदनशीलता।

मैनिंजाइटिस के कारण :-

1 फंगल इंफेक्शन।

2 सिफलिस।

3 ट्यूबर कुलोसिस।

4 आटोइम्यून डिसऑर्डर।

5 कैंसर की दवाएं।

6 संक्रमण मैनिंजाइटिस ।

जटिल एवं असाध्य रोगों का वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति द्वारा उपचार

अनमोल हेल्थ केयर छत्तीसगढ़

डॉ हलधर पटेल

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मस्सा Wart .. .

परिचय ..—–यह बाहरी त्वचा( Epidermis ) का स्थानिक सुदाम में वृद्धि हैजो DNA Virus के कारण होता है यह एक contagious रोग है जो अधिकतर बच्चों में होता है कभी-कभी बड़े लोगों में भी देखा जाता है मसक ,वीरू का , अधिमांस ,आदि नामों से जाना जाता है इसे वायरल मस्सा भी कहते हैं इस रोग में त्वचा का ऊपरी भाग मोटा होकर मक्का के समान काला हो जाता है इसे बाहरी त्वचा मोटा होकर वृद्धि हो जाते हैं

इसमें अंकुरक ( pappillae )भी निकल आते हैं यह मस्सा 2 ,4, होते हैं पर कई बार पूरे शरीर भी छोटे-छोटे काफी मात्रा में फैल जाती है .. यह अधिकांश हाथ पर निकलते हैं कभी-कभी सिर गर्दन पर चेहरे एवं जननांग पर भी हो जाती हैं..

कारण ..——यह रोग प्राया बाल अवस्था व्यवस्था में होते हैं यह संक्रमण रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान पर संपर्क में आने से फैलता है इसका संक्रमण सामान्य रूप से उंगलियों और आत्मा को प्रभावित करता है लक्षण छोटे-छोटे दानों के रूप में दाढ़ी सिर चेहरे हाथ पैर आदि पर होता है

इनका ऊपरी भाग गोभी के फूल के समान होता है खुजलाने पर अन्य स्थानों पर फैल जाती हैं पैर के तलवे पर निकलने से तीव्र दर्द होती है.

मस्सा चार प्रकार की होती है..

1 .सादा मस्सा यह छोटे छोटे साइज में अधिकतर हाथ पैर व चेहरे में होते हैं हम कई बार एक साथ निकलते हैं. 2. पाद तल( Planter wart ) मस्सा यह तलवे के अग्रभाग में अथवा एड़ी का पीढ़ी पर होता है यह साधारण मसा के बराबर होता है लेकिन ज्यादा सूखने पर गठान शुरू हो जाता है और इससे खरोच ने पर ब्लड खून निकलने लगता है ..

3. साधारण मस्सा( common wart ) यह अपेक्षाकृत बड़ा साइज का होता है यह हाथ और जोड़ों में राया होते हैं वहीं की ऊपरी सतह सख्त होती है

4. कांडीलोमेेटा (condylomata acuoninata ) यह साधारण होता है परंतु या जन इंद्रियों के ऊपर होता है या कई बार गुदा मार्ग के चारों ओर होता है अधिकतर यह संख्या में बहुत होते हैं और अक्सर इन्हें खूनी मस्सा कहते हैं

परहेज —–ज्यादा तेल, मसाले, मांस, मछली, अंडा आदि से परहेज करना चाहिए …

चिकित्सा —- eh हर्बल मेडिसिन में हमारे यहां बहुत से लोग मस्सा से निजात मिला है और अभी पूरी तरह से ठीक है

2 mmसे लेकर 4 इंच तक मस्सा हमारे यहां हर्बल मेडिसिन के द्वारा ठीक हुए हैं . हम अभी पूरी तरह स्वस्थ है स्वस्थ हैं

धर्मार्थ सूरज क्लिनिक एंड इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा खमतराई रायपुर


डॉ डी के साहू .
9630 2460 97

QUANTUM RESONANCE MEGNETIC ANALYZER (QRMA)

QRMA  एक आधुनिक मशीन है।इसमें न तो किसी प्रकार की BLOOD SAMPLE की जरूरत पढ़ती है और न ही जांच के लिए किसी वस्तु को शरीर के अंदर प्रवेश कराया जाता है।

इसे केवल हथेली में पकड़ कर स्केन किया जाता है और बहुत ही कम समय में ही पूरे शरीर की जाँच हो जाती है । यह MAGNETIC RESONANCE के माध्यम से पूरे शरीर की  स्केन करती है। इस प्रकार यह बहुत ही सहज और आसानी से की जाने वाली जाँच की प्रकिया है। जिसमे शरीर को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता और न ही किसी प्रकार का दर्द होता है।

इस मशीन से कुछ ही समय मे पूरे शरीर की जाँच हो जाती है।

इसमें एक साथ 34 से अधिक REPORT प्राप्त होते हैं जो इस प्रकार है – 

1.  CARDIOVASCULAR AND CEREBROVASCULAR  ANALYSIS


2.  GASTROINTESTINAL FUNCTION ANALYSIS


3.  LIVER FUNCTION


4.  GALLBLADDER FUNCTION


5.  PANCREATIC FUNCTION


6.  KIDNEY FUNCTION


7.  LUNG FUNCTION


8.   BRAIN NERVE


9.   BONE DISEASES


10. BONE MINERAL DENSITY


11.  RHEUMATOID BONE DISEASES


12.   BONE GROWTH INDEX


13.  BLOOD SUGAR


14.  TRACE ELEMENT


15.  VITAMIN


16.  AMINO ACID 


17.   COENZYME


18.   ENDOCRINE SYSTEM


19.  IMMUNE SYSTEM


20.  HUMAN TOXIN


21.   HEAVY METAL


22.   BASIC PHYSICAL QUALITY


23.  ALLERGY


24.  SKIN


25.  EYES


26.  COLLAGEN


27.   LARGE INTESTINE FUNCTION


28.  THYROID


29.   OBESITY


30.  CHANNELS AND COLLATERALS


31.   PULSE OF HEART AND BRAIN


32.  BLOOD LIPIDS


33.   GYNECOLOGY / PROSTATE


34.   BREAST / MALE SEXUAL FUNCTION


35.   MENSTRUAL CYCLE / SPERM AND SEMEN


36.  FATTY ACID


37. ELEMENT OF HUMAN


इस प्रकार बहुत कम समय और बहुत ही आसानी से पूरे शरीर का REPORT हमे प्राप्त होता है। इससे हमें सही उपचार करने में सहायता मिलती है और बड़े ही आसानी से मरीज का ईलाज शुरू करते हैं।

ये वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति में उपयोग होने वाले System में से 1 है

अधिक जानकारी के लिये आप हमें व्हाट्सअप पर भी संपर्क कर सकते हैं

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हमारा पता –

अनमोल हेल्थ केयर, संतोषी नगर रायपुर

कोशरिया मरार समाज भवन, बिलासपुर रोड सारँगढ़

For emergency cases        +91-9098472777