Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

स्वेत प्रदर (leukorrhoea ) . .

परिचय —–गर्भाशय नलिका अथवा योनि से सफेद या पीलापन लिया हुआ चिपचिपा श्राव का निकलना श्वेत श्वेत प्रदर कहलाता है योनि से सफेद पानी जाना स्त्रियों का प्रमेह रोग है यह महिलाओं में होने वाले काफी संक्रमित रोग हैं..

कारण ——-1.कुछ परजीवी का आक्रमण अथवा प्रकोप इन्फेक्शन मुख्य कारण है जैसे ट्राईकोमोनल तथा मनोलियल तथा सुजाक अथवा सिफलिस..

2. दूसरा सामान्य कारण प्रजनन अंगों की अस्वक्षता

3. कुपोषण व अल्प पोषण

4. अंतः स्रावी ग्रंथियों की कार्यप्रणाली असंगति होना

5. शरीरिक सक्रियता का अभाव जैसे बेमेल विवाह जीवन का सामंजस्य न हो पाना

6 .चिंता भय क्रोध तनाव मानसिक रोगों के कारण भी हो सकती है

7 . रितु स्राव में अनियमितता जल्दी-जल्दी प्रसव व गर्भपात अत्यधिक मैथुन आघात कृतिम गर्भ निरोधक उपाय

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8. श्वास रोग श्वास रोग, रक्त दोष ,चर्म रोग, संधि वाद जॉन्डिस व कृमि रोग भी इसका कारण हो सकता है

9. बालिकाओं में श्वेत प्रदर प्राया योनि में प्रवेश हो जाने वाली सूत्र क्रीमी गंदगी ठंडी चीज अत्यधिक सेवन से अधिक सेवन ठंडी जगह रहने आदि कारण हो सकता है

लक्षण

1.-रोग के प्रारंभ में स्त्री को शारीरिक कम जोरी का अनुभूति होती है

2. शरीर में खून की कमी बार बार चक्कर आना

3.आंखों के सामने अंधेरा छा जाना

4 .भूख न लगना

5. शौच साफ ना होना बार-बार पेशाब होना पेट खाली पर लगना व दर्द होना

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7 . जांघों में भारीपन एवं उनकी में खिंचाव शर्म महसूस होना

8 . श्वास कष्ट एवं मुरझा हो जाना

9 .योनि में खुजली और लाल, पीला द्रव निकलने लगता है

10. स्त्री की चेहरा दिन प्रतिदिन पीला सा पड़ने लगता है

11. कमर और पिंडलियों में दर्द रहने लगता है लुकोरिया आमतौर पर तीन प्रकार की होती है-

1. मोनी लिया लुकोरिया यह योनि से निकलने वाला पानी सफेद दही के समान गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ होती हैं तथा योनि के आसपास खुजली होती हैं

2. ट्रोको मानस लुकोरिया इसमें निकलने वाले पानी पतला व पीले रंग का होता है साथ ही खुजली भी होती है

3 सुजाक के कारण होने वाली लुकोरिया में योनि से निकलने वाला पानी पस और बदबूदार होती हैं तथा पेशाब करते समय जलन की अनुभूति होती है

रोग की पहचान — पहचान के लिए ब्लड टेस्ट ,यूरिन टेस्ट, स्टूल, वा वीडीआरएल की जांच की आवश्यकता हो सकती है

परिणाम ——1.समय पर उपचार करने से आसानी से ठीक हो जाती हैं 2 .इसका समय पर उपचार न होने से कई बार यह बच्चेदानी में इंफेक्शन बढ़ जाती है जिसके कारण बच्चेदानी सूजन हो जाते हैं और सूजन होने के पश्चात इसमे छाले हो जाता है और बाद में डॉ बच्चेदानी को निकालने के लिए बोलते हैं और नहीं निकालने से दो-तीन साल बाद या कैंसर का रूप धारण कर लेता है जोकि बहुत भयंकर हो सकता है

चिकित्सा—– हमारे यहां e h harbal medicine से इस तरह की केस बहुत लोगों ठीक हुए हैं और अभी भी कुछ लोगों के उपचार जारी हैं …

परहेज —- ज्यादा तेल ,मसाला, खट्टा ,मैदा, ठंडी चीज का उपयोग नहीं करनी चाहिए

डॉ डी के साहू
कर्मा इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा केंद्र

खमतराई, रायपुर

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