Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

हाइपरथयरोडिज्म

थाइरोइड ग्रंथी में T3 और T4 यह दो थाइरोइड हॉर्मोन निर्माण होते हैं। जो कि हमारे शरीर के चयापचय प्रणाली और अन्य हॉर्मोन के कार्यों को नियंत्रित करते हैं। किसी कारण वश थाइरोइड ग्रंथि में इन हॉर्मोन के सामान्य से अधिक निर्मित होने की अवस्था को हाइपरथयरोडिज्म कहा जाता है। हाइपरथयरोडिज्म के कारण शरीर पर कई प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं।


हाइपरथयरोडिज्म का क्या कारण हैं:-
1 Grace’s Disease:- यह एक auto immune रोग है। यह महिलाओं में अधिक पाया जाता है। और यह परिवार में कई लोगो को हो सकता है। इस रोग में शरीर के Antibodies के कारण थाइरोइड ग्रंथि से हॉर्मोन का स्त्राव अधिक होता है।
2 अधिक मात्रा में आयोडीन शरीर में जाने पर थाइरोइड ग्रंथि में हॉर्मोन की निर्मिति अधिक होती है।

3 अंडाशय में गांठ।
4 वृषण में गांठ।
5 Lithium Cabinet जैसी दवा।
6 Pituitary या Hypothalamus ग्रंथि में गड़बड़ी।
7 थाइरोइड ग्रंथि में गांठ।
8 गलघोटु

हाइपरथयरोडिज्म के क्या लक्षण होते हैं:-
हाइपरथयरोडिज्म में कई सारे लक्षण पाये जाते हैं। जरूरी नहीं है कि किसी हाइपरथयरोडिज्म के रोगी में यह सारे लक्षण पाये जाये।

हाइपरथयरोडिज्म के लक्षण निम्न हैं –
गर्मी सहन न होना , ज्यादा पसीना आना, बालों का झड़ना, कमजोरी, ह्रदय गति तेज होना, निन्द्रनाश, अकारण वजन कम होना, पुरुषों में स्तन व्रद्धि, हाथ काँपना, कम मासिक आना, खुजली आना, नरम नाखून,
हायपरथयरोडिज्म के कुछ रोगियों में Cardiac Failure होने के कारण सांस लेने में तखलिफ , घबराहट , सिने में दर्द और चक्कर आना ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

उपचार:- हर्बल मेडिसिन “THROID KIT” के सहायता से हाइपो/हायपरथयरोडिज्म को ठीक किया जा सकता है। इसके साथ साथ योग और प्राणायाम भी किये जाते हैं।

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संपर्क :- “अनमोल हेल्थ केयर “

“डॉक्टर हलधर पटेल”
9098472777

“अपने संपर्क में जरूर साझा करें धन्यवाद।”

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