Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

किडनी में पथरी (renal calculi/stone in the kindney)

परिचय —–इस किडनी के रोग में या तो मूत्राशय में रेत पैदा हो जाती हैं और यह रेत (गुर्दा) किडनी जब मिलकर एक आकार बना लेती हैं ,तब यही वृहद आकार की रेट कारणों को पथरी कहा जाता है पथरी मशरूम के दाने से छोटे अंडे के आकार तथा बड़ी भी हो सकती है ..

कारण —- किडनी की पथरी किसी भी आयु वाले को हो सकती हैं परंतु इस रोग से जवान और अधिक उम्र वाले ,अधिक ग्रसित हुआ करते हैं ,जो व्यक्ति र आराम जीवन अधिक व्यतीत करते हैं और उन्हें लिवर की खराबी होती हैं ..परंतु वे मांस, मदिरा ,अंडे ,पुलाव ,और एलोपैथिक मेडिसिन (अंग्रेजी दवाई सल्फर ग्रुप की) का अधिक सेवन करते हैं तब कैल्शियम ,सल्फर के कारण बिना बचे हुए किडनी में एकत्रित होते रहते हैं .गठिया , उपदंश, आदि कारण हो सकते हैं जिनके मूत्र में कैल्शियम आता है और रोगियों में पथरी अधिक पाई जाती हैं ..

लक्षण ——-जब किडनी में पथरी होती हैं तब वह शांत रहने पर कोई दर्द नहीं करती परंतु जब वह स्थान या जगह बदलती है तब पेशाब करते समय बहुत दर्द होता है रुक रुक कर बार-बार थोड़ा-थोड़ा होता है, पेशाब में एल्बुमिन, रक्त ,पस ,आने लगता है और किडनी में सूजन हो जाती हैं ,तब रोगी को कमर में दर्द और लिंग के मुंह पर होती हैं रोगी को उल्टी के साथ ,बेहोश व बुखार हो जाता है तब दुर्बलता और संकट की घड़ी आ सकती हैं ..

परिणाम — पथरी तीन प्रकार की होती हैं , 1. यूरिक एसिड की ,2 . फास्फेट ऑफ कैल्शियम .3. ऑक्जेलिट ऑफलाइम यह सभी कष्ट तो देती ही है परंतु चिकित्सा से ठीक हो जाती हैं ..

परहेज —-.1 .रोगी को मांस, मदिरा ,उड़द की दाल व बड़ी ठंडी पानी ,खट्टा दही ,लाल मिर्च अधिक मिथुन , अधिक कसरत वह मल त्याग करते समय ज्यादा वेट आदि हानिकारक होते हैं ..

.2 दूसरा रोगी को पतले चीज खानी चाहिए ,जैसे संतरा ,सेव, ,खीरा, गाजर, आदि पीना चाहिए यह लाभकारी है..

चिकित्सा .—- हर्बल मेडिसिन में इसकी बहुत ही अच्छी तरीका से उपचार की जाती है कंडीशन के हिसाब से मेडिसिन स्टेप बाय स्टेप दवाई सेट करना पड़ता है और कुछ महीने में यह पूरी तरह से पथरी बीमारी से स्वस्थ हो जाते हैं .

डॉ डी के साहू ..

धर्मार्थ सूरज क्लीनिक एंड कर्मा इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा केंद्र

खमतराई रायपुर

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