Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

बवासीर

बवासीर गुदा (मलद्वार) में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। जिसमे मलत्याग के समय रक्तस्त्राव तथा मस्से फूलने की समस्या होती है। इसे पाईल्स या हीमोराइड्स भी कहते हैं। यह बीमारी स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में कुछ ज्यादा होती है।



बवासीर का प्रमुख कारण पेट की खराबी व पाचन तंत्र का कमजोर होना है। इसके अतिरिक्त कारण निम्न हैं –
1 लंबे समय तक कब्ज रहना।
2 मलत्याग के समय जोर लगाना।
3 टॉयलेट में काफी देर तक बैठना।
4 हेरिडिटी(वंशानुगत कारण)
5 अतिसार (दस्त)


बवासीर का प्रमुख लक्षण:-
1 मलत्याग के समय रक्तस्त्राव:- सामान्यतः ताजा रक्त बूंदों या धार के रूप में निकलता है जो दर्द रहित होता है परंतु जब बवासीर के साथ फिशर (गुडचिर या कटाव) भी होता है तो रक्तस्त्राव के साथ दर्द भी हो सकता है।
मलत्याग के समय मस्सों का बाहर निकलना:- रोगी जब टॉयलेट में बैठकर जोर लगाता है तो मस्से बाहर आ जाते हैं व जब जोर हटाता है तो मस्से अंदर चले जाते हैं। कभी कभी जब बवासीर पुरानी हो जाती है तो मस्सो को अंदर करने के लिए उंगली का सहारा देना पड़ता है।
2 म्यूकस का निकलना:- कभी कभी मस्सों के स्थान पर शेल्समिक द्रव का स्राव भी हो सकता है।


बवासीर के बचाव के उपाय:-
1 भोजन संबधी आदतों में बदलाव:- रेशेदार सब्जियां, सलाद व फलों का नित्य सेवन करें ,तेज मिर्च मसलो का प्रयोग न करे, पानी 5 से 6 लीटर पियें, चाय , कॉफी का प्रयोग करें, इससे पेट ठीक रहेगा और कब्ज नही होगी।
2 मलत्याग के समय ज्यादा जोर ना लगायें।
3 यदि कब्ज हो तो रात में दूध के साथ मुनक्का व 1 से 2 चम्मच इसबगोल की भूसी लें।

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