Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

डॉ आरती साठे ,जो रायपुर छत्तीसगढ़ से है ,अपनी मेडिकल की शिक्षा पूर्ण करने के बाद रायपुर मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापक रहीं हैं,प्राकृतिक कृषि ,टैरेस गार्डेनिंग और अरोमा थेरेपी की राष्ट्रीय प्रशिक्षक भी है,

पिछले 12वर्षों से अनेक संस्थाओं के साथ किसानों और देसी गौ सेवा हेतु कार्य कर रहीं हैं,गांव में किसानों को रसायन मुक्त कृषि प्रशिक्षण देते हैं,इस के द्वारा आर्थिक विकास और उनके उत्थान हेतु जैविक बाज़ार व्यवस्था करवाते हैं, साथ ही शहरी क्षेत्रों में टैरेस गार्डेनिंग और बच्चों को भी बागवानी का प्रशिक्षण देते हैं,


पूरे भारत में डॉ आरती के साथ अनेक राज्यों के किसान और शहरी क्षेत्रों के सदस्य जुड़े हुए हैं, साथ ही राज्य सरकार के साथ भी और आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के साथ भी बहुत सारे प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया है, और वन विभाग के साथ नक्सल प्रभावित जिलों में भी कार्य किया है,


महिलाओं और ग्रामीण सदस्यों के आर्थिक मदद हेतु इनकी संस्था कार्यरत हैं,
पर्यावरण के क्षेत्र में पिछले 5 वर्षों से राज्य सरकार ,वन विभाग के साथ पौधारोपण और मेडिसिनल प्लांट्स ,पर प्रोजेक्ट कर रहे है,


कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत भी किया जा चुका है,
इनकी खुद की गार्डेनिंग कंसल्टेंसी फर्म है,और ऑर्गेनिक फूड का बिजनेस भी है


डॉ आरती का मानना है,की जिस तरह आज इतने खतरनाक रसायन और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है जो हमारे स्वस्थ और पर्यावरण दोनों के लिए बहुत ही नुकसानदेय है, आज छोटे छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक इतनी भयानक बीमारियां जैसे डायबिटिक,आंखों की परेशानी, कैंसर आदि बहुत आम बात हो गई है, हम अगर गौर से देखें तो ये सब परेशानी की जड़ हमारा रासायनिक खाद द्वारा उत्पन्न भोजन ही है,


शहरों में आज किचन गार्डन या बागवानी शौक नहीं बल्कि जरूरत बन गई है , बाज़ार में मिलने वाली जहरीली सब्जियां और फल जिसमें इतने रसायन कीटनाशकों का उपयोग होता है, मनमाने दामों में होती हैं , रासायनिक स्प्रे द्वारा फ्रेश रखा जाता है,

हमारे पास ऑप्शन नहीं होने के कारण हमें बाज़ार से लेना पड़ता है, यदि हम घर पर ही उगा लें तो बजट भी और स्वास्थ भी बचा रहेगा, इस व्यवस्था के लिए कोई बहुत बड़े सेट अप या महंगे समान की जरूरत नहीं होती, हम तरीके से करे तो छोटी से छोटी जगह पर भी बहुत अच्छी तरह से अपने परिवार के लिए शुद्ध रसायन मुक्त स्वास्थ वर्धक सब्जी फल उगा सकते हैं, घर पर ही हम किचन वेस्ट से और कुछ रसोई की सामग्री से खाद बना सकते हैं तो पर्यावरण सरंक्षण भी हो सकता है,


सबसे बड़ी बात तो ये है कि हमारे भीतर इतना संतोष होगा कि हमने जो भोजन आज अपने परिवार को बच्चों को खाने के लिए दिया उसमें किसी भी प्रकार का ज़हर नहीं था, ये संतोष और विश्वास ही हमारी सकारात्मक ऊर्जा है हमारी खुशी है हम निश्चिंत है कि हम कोई ज़हर घर पर खरीद कर नहीं ला रहे, और हम प्रकृति, पर्यावरण के साथ गलत भी नहीं कर रहे ।
घर पर बागवानी करने से परिवार के सभी सदस्य इसका हिस्सा होते हैं घर में हराभरा दिखाए देने पर सकारात्मक सोचो और ऊर्जा अपने आप आती हैं साथ ही बच्चे भी घर ,प्रकृति और पर्यावरण को समझते हैं जानते है उनका लगाव बना रहता,है जब बच्चा अपनी आंख के सामने एक बीज को बढ़ते, फल, फूल बनाते देखता है तो वो अनुभव उसके अंदर भावनात्मक जुड़ाव को जन्म देता हैं,
और आज जो माहौल है जिस डर और तनाव को हम पिछले कई महीनों से झेल रहे हैं ,कहीं ना कहीं उसके पीछे प्रकृति पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है है ,

रासायनिक भोजन के परिणामस्वरूप हमारे शरीर में उतनी ताकत ही नहीं की किसी विपरीत परिस्थिति का सामना कर सके या जो आज कल सब इम्यूनिटी सिस्टम की बात कर रहे हैं वो स्ट्रॉन्ग कर सके ,क्यों की हमारा भोजन ही विषाक्त है,
मेरे पास भी बहुत से फोन रोज़ होते हैं सलाह के लिए की हम घरों ,छतों,बालकनी ,बगीचे में किस तरह और कैसे किचन गार्डन करें कैसे लगाएं , करोना कल में सबको समझ आया है कि जितना प्रकृति के साथ जुड़े रहेंगे तभी बचे रहेंगे ,
लॉक डाउन के दौरान वो बहुत खुश निश्चिंत रहे जिनके घर पहले से ही किचन गार्डन तैयार था,
अभी तो करोना और लॉक डाउन के चलते हम समक्ष वर्क शॉप नहीं ले सकते ,इसलिए हम लगातार ज़ूम पर ऑन लाइन ऑर्गेनिक होम गार्डेनिंग की वर्क शॉप लेते रहते ताकि हम इस समय का सदुपयोग कर सके और अपने भोजन की प्लेट में से ज़हर को हटा सके

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