Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

अल्जाइमर और डिमेंशिया (Dementia And Alzheimer In Hindi) दोनों ही न्यूरोलॉजिकल विकार है। इन दोनों ही बीमारियों में उम्र बढ़ने के साथ ही बदलाव देखे जाते हैं। यादाश्त का कमजोर होना सोचने समझने में दिक्कतों का सामना करना, महत्वपूर्ण बदलावों में से एक हैं। इसके ज्यादातर लक्षण एक जैसे होने के कारण या पहचान पाना मुश्किल होता है कि किसी व्यक्ति को अल्जाइमर है या डिमेंशिया।

अल्जाइमर और डिमेंशिया में क्या अंतर – (Difference Between Dementia And Alzheimer In Hindi)

डिमेंशिया एक ऐसी टर्म है जिसका प्रयोग ऐसे डिसऑर्डर की व्याख्या करने के लिए किया जाता है जिसमें दिमाग पर प्रभाव पड़ा हो जैसे याददाश्त, व्यवहार, सोच विचार करने की क्षमता, जज्बात आदि। दूसरे शब्दों में अगर मरीज की कॉग्निटिव हेल्थ (सोचने-समझने की शक्ति) पहले से कमजोर है, जिस कारण उसकी रोजाना की गतिविधियां प्रभावित हो रही हो तो इसे ही डिमेंशिया कहा जाता है।

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वहीं, अल्जाइमर बीमारी डिमेंशिया का सबसे प्रमुख प्रकार है। अन्य प्रकारों में वैस्कुलर डिमेंशिया, पार्किंसन डिजीज डिमेंशिया, फ्रंट टेंपोरल डिमेंशिया आदि शामिल हैं। अन्य प्रकार का डिमेंशिया मिक्सड डिमेंशिया कहलाता है जिसमें अल्जाइमर और वैस्कुलर के लक्षण मिले हुए होते हैं।

अल्जाइमर के लक्षण – (Alzheimer’s Symptoms In Hindi)

अल्जाइमर के मरीजों में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जैसे

  • एक ही प्रश्न और बयान को बार-बार दोहराना या पूछना
  • किसी के साथ हुई बातचीत, कोई इवेंट या अपॉइंटमेंट को भूल जाना
  • किसी भी सामान को उस जगह के बजाय गलत जगह पर रख देना, सामान जहां पहले रखा था
  • जानी पहचानी जगह को भूल जाना
  • वस्तुओं की पहचान करने अपने विचारों को व्यक्त करने बातचीत में हिस्सा लेने के लिए सही शब्द खोजने में परेशानी होना

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डिमेंशिया के लक्षण – (Dementia Symptoms In Hindi)

डिमेंशिया के लक्षण कारणों के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं जैसे:

  • याददाश्त में कमी, जो आमतौर पर कोई दूसरा व्यक्ति नोटिस करता है
  • बातचीत करने या तर्क करने में कठिनाई होना
  • कठिन कामों को करने में कठिनाई होना
  • किसी चीज की योजना बनाने या आयोजन करने में परेशानी
  • हमेशा कंफ्यूज रहना
  • पर्सनालिटी में बदलाव
  • डिप्रेशन
  • चिंता
  • घबराहट
  • पागलपन
  • बुरे सपने
  • गलत व्यवहार

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जब भी डिमेंशिया या अल्जाइमर के लक्षण दिखें तो तुरंत आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। किसी भी प्रकार के मानसिक विकार को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, और न ही किसी भी पेशेंट के साथ होने वाली इन घटनाओं का मजाक नहीं बनाना चाहिए बल्कि उसे चिकित्सक से मिलने की सलाह देनी चाहिए। इस प्रकार की समस्या किसी के साथ भी हो सकती है।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी में डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर दोनों का उचित व्यस्थापन देखा जा रहा है, लोग इसमे जल्दी ही ठीक हो रहे हैं, जिससे इस पद्धति के प्रति लोगों की आस बढ़ी है

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