Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

अतिसार(Diarrhoea)

आमतौर पर इसे बार-बार आने वाला दस्त कहा जाता है, इसे पेट झड़ना भी कहा जाता है।

सामान्य बोलचाल की भाषा में बार-बार दस्त आना कहते है।

.डायरिया(अतिसार) अचानक होकर एक या दो दिन तक रहता है,

तीव्र डायरिया में मल(stool) की संख्या बहुत बढ़ जाती है और यह बहुत पतला होता है।

डायरिया के कारण:-
ये दो प्रकार से होता है

संक्रामक

असंक्रामक

. संक्रामक(infection) –


. ई कोलाई


. शिजेला बैक्टीरिया


. साल्मोनेली समूह का बैक्टीरिया


. स्टेफीलोकोक्स


. Classitridium group


. रोटावायरस


. प्रोटोजोअल
इत्यादि।

असंक्रामक :-


. पाचन तंत्र में गड़बड़ी के कारण।
. दूषित भोजन या पानी।

लक्षण


. रोगी को बार- बार दस्त आते है।


. कभी- कभी दस्त के साथ रक्त भी आता है और उसमें आव भी होती है।


. पेट मे भारीपन व गड़गड़ाहट होती है।


तीव्र डायरिया में रोगी को पानी की कमी(डिहाइड्रेशन) हो जाता है।


. रोगी को थकान व बेहोशी महसूस होती है।


. रोगी का वजन कम हो जाता है।

उचित समय मे रोगी की उचित चिकित्सा नही हो पाने के कारण रोगी दशा बिगड़ती जाती है, और उसमें पानी(electrolytes)

की कमी से मृत्यु तक हो सकती है।

. इस रोग में सही समय पर चिकित्सा आवश्यक है। इसमे रोगी बिल्कुल ठीक हो जाता है।

पानी की कमी(electrolytes) को पूरा करना चाहिए।

इलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सा (Electrohomeopathy treatment)

(1) S10, C10(D3), – 10 10 गोली दिन में चार बार

(2) S1, L1 C13 – 3th dilution 10 10 drop चार बार

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