Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care

रक्त की कमी(Anemia)

इसे अन्य शब्दो मे रक्ताल्पता, रक्तक्षीण ता के नाम से भी जाना जाता है।

परिभाषा(Defination):- शरीर मे ऑक्सीजन पहुँचाने वाली तत्व की रक्त में कमी यानी “हीमोग्लोबिन” की मात्रा की कमी हो जाने पर इसे एनीमिया या रक्त की कमी कहा जाता है।
प्रायः यह अपने आप के कोई रोग नही है,वरन किसी अन्य रोग का लक्षण है।

कारण(Cause):- लाल रक्त कणिकाएं(Rbc) अस्थिमज्जा(Bone marrow) में बनती है व खुन के दौरे में करीब 120 दिन तक जीवित रहती है, उसके बाद रेटीक्यूलो इंडोथिलीयल सिस्टम द्वारा समाप्त हो जाती है। प्रतिदिन 0.84% रक्त कणिकाएं कुल लाल रक्त कणिकाओं से बनती व खत्म होती रहती है। इस प्रकार एक स्वास्थ्य व्यक्ति में इनका स्तर एक सा बना रहता है।

यदि किन्ही कारण वश इसके बनने में कमी या नष्ट होने में अधिकता आ जाये तो इसे ही एनीमिया कहते है।

एनीमिया के प्रकार(Types of anemia):-

लाल रक्त कणिकाओं के बनने में कमी:-
◆ फोलिक एसिड, आयरन, विटामिन B12 आदि का शरीर मे पर्याप्त मात्रा में न होना, जो इन कोशिकाओं के बनने में सहायक होता है।
एप्लास्टिक एनीमिया- अस्थि मज्जा में साइटोटोक्सिक औषधि के प्रयोग से या एक्स रे के द्वारा नष्ट हो जाने के कारण लाल रक्त कणिकाएं कम बन पाती है।


न्यूट्रिशनल एनीमिया- भोजन में पोषक तत्वों की कमी या आंत द्वारा इनके अवशोषण में कमी के कारण।
हिमोलिटिक एनीमिया- यह अधिकतर जन्मजात होता है, परन्तु कभी कभी संक्रमण के कारण या औषधियों के विषैले प्रभाव से लाल रक्त कणिकाओं(Rbc) के अधिक टूटने से हो सकता है।
हाइपर क्रोमिक एनीमिया।
मेग्लोबलास्टिक एनीमिया।
सेप्टिक एनीमिया।
सिकल सेल एनीमिया।
स्प्लिनीक एनीमिया।

रोग के प्रमुख लक्षण(men symptom’s of cause) :-
◆ कमजोरी, थकावट, चिड़चिड़ापन,शक्ति की कमी एकाग्रता की कमी, चक्कर आना, शरीर के विभिन्न भागो में दर्द रहना आदि।

◆ हृदय(heart) का तेज-तेज धड़कना।

◆ थोड़ा काम करते ही सांस फूलने लगना।

◆ शरीर पीलापन से लिये दिखाई देना, हल्का-हल्का बुखार रहना।

◆ पैरों में सूजन आ जाना।

◆ भूख कम लगना, नींद न आना, बेचैनी रहना।
◆ दिमाग मे ऑक्सीजन की पूर्ति न हो पाने के कारण स्मरण शक्ति में कमी, उलझन रहना आदि।

चिकित्सा:- ◆ लक्षणों व जांच के द्वारा कारण का पता लगाकर उसकी चिकित्सा करें।

◆ हरे पत्ते की सब्जी, अमरूद अधिक ले।

◆ चुकंदर का प्रयोग काफी लाभकारी होता है।

इलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सा( Electrohomeopathy treatment) :-

S5+C5 (3rd) – 10 10 drop दिन में तीन बार

S1+A3+RE – खाने के पहले 10 10 गोली सुबह शाम

S10+C10+YE – खाने के बाद 10 10 गोली सुबह शाम।

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