Open/Close Menu Dr. Haldhar Patel | Anmol Health Care


शरीर को प्रतिदिन 84 मिनरल्स या खनिज लवण चाहिये क्योंकि हमारे मिनरल्स की आयु सिर्फ 24 घण्टे ही होती है इसीलिए हमें इनकी प्रतिदिन की आवश्यकता होती है।

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लेकिन सभी तुक्के लगाकर सेल्फमेड सलाहकार बनकर कुछ न कुछ खिलाये जा रहे हैं और रिज़ल्ट कुछ भी नहीं….
शरीर के लिए प्रतिदिन आवश्यक खनिज लवण, जिन्हें प्राकृतिक तरीके से पा सकते हैं।
केमिकल से बने मिनरल्स फायदा तो करते हैं परन्तु प् साइड इफेक्ट्स के साथ…..

खनिज लवणों के प्रमुख प्राकृतिक स्रोत…..

(1). कैल्शियम -CALCIUM दूध,  पालक, टमाटर, अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, ताजे फल

(2)फॉस्फोरस– PHOSPHORS दूध, अंकुरित अन्न , हरी सब्जी, ताजे अन्न। 

(3) पोटेशियम – POTASSIUM अंकुरित अन्न, हरी सब्जी। 

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(4). सोडियम – SODIUM पनीर, दूध, छेना, हरीसब्जी, ताजेफल। 

(5) क्लोरिन – CHLORINE सेंधा नमक, दूध, हरी सब्जी, अंकुरित अन्न।समुद्री नमक बिल्कुल नहीं।

(6). लोहा – IRON हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न, खुर्बानी, कालीदाक्ष, तिल, सेव, अंगूर। 

(7). मैंग्नीज -MANGANESE हरी सब्जियां, फल, अंकुरित अन्न। 

(8) तांबा – COPPER ताजी हरी सब्जियां, अंकुरित अन्न। 

(9). आयोडिन – IODINE सेंधा नमक, दूध, समुद्री- खाद्य पदार्थ।समुद्री नमक बिल्कुल नहीं।

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(10) फ्लोरिन – FLUORINE हरी सब्जी, फल, अंकुरित अन्न। 

(11). जस्ता – ZINK खमीर, अंकुरित गेहूं ,यीस्ट आदि। 

(12). कोबाल्ट – COBALT अंकुरित अन्न, जीवन्त आहार। 

(13)मोलिब्डनम् – MOLYBDENUM हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न। 

Collection of minerals. Iron ore, sandstone, apatite, quartz, bauxite, limonite, phosphorite, magnesite, gypsum, agate, asbestos, marble, corundum, kaolin and other minerals.

(14). सिलीकोन – SILICONE अनाज, हरी सब्जी, ताजे फल, जीवन्त आहार इत्यादि।

हममें से भी कई लोग दिल संबंधी बीमारियों को लेकर काफी लापरवाही बरतते हैं. हार्ट हेल्थ को लेकर की गई ये लापरवाही कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है.

ऐसे में ये बेहद जरूरी हो जाता है कि हम समय रहते ही कमजोर हो रहे हमारे दिल की स्थिति को पहचान लें और उसी हिसाब से अपने दिल की सेहत को दुरुस्त करें.बता दें कि हार्ट से जुड़ी समस्याएं शुरू होने पर इसका संकेत हमारे शरीर को विभिन्न तरीकों से मिलने लगता है.

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बीमार महसूस करना

दिल कमजोर होने पर हर वक्त बीमार सा महसूस होने लगता है. अगर चेस्ट पेन के साथ उल्टियां भी हो रही हैं तो ये दिल संबंधी बीमारी के संकेत हो सकते हैं. आप अगर कोई मेहनत का काम नहीं कर रहे हैं उसके बाद भी बीमार महसूस करते हैं तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

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ज्यादा पसीना आना

 काम करने के दौरान शरीर से पसीना आना सामान्य प्रक्रिया होती है. लेकिन अगर आपको को सामान्य तापमान में भी सीने में दर्द के साथ ही गर्मी महसूस होती है और पसीना आना शुरू हो जाता है तो ये कमजोर दिल या हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं.

धड़कन का कम अथवा अधिक होना

दिल के कमजोर होने का एक और कॉमन संकेत है दिल की धड़कन का अनियमित होना. आप भी अगर अपने दिल की धड़कन को अनियमित महसूस करते हैं तो डॉक्टर से चेकअप कराना जरूरी है

सायटिका का उपचार इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की दवाइयों और थेरेपी के द्वारा संभव है जाने पूरी जानकारी (इसे भी पढें)

सीने में दर्द

 हमारा दिल खतरें में है इसका सबसे कॉमन संकेत होता है सीने में भारीपन का महसूस होना. आपकी अगर आर्टरी ब्लॉक हो चुकी है या फिर हार्ट अटैक आया है तो आप दर्द, कड़कपन या सीने में दबाव महसूस कर सकते हैं. अलग-अलग लोगों में इसे लेकर अलग-अलग संकेत सामने आते हैं.

कई लोगों को लगता है कि उनके सीने में बेहद भारी चीज़ रखी हुई है. ये तब महसूस हो सकता है जब आप आराम कर रहे हैं या फिर कोई फिजिकल वर्क कर रहें हैं

पेट दर्द

पेट में दर्द बना रहना या फिर डाइजेशन ठीक न होना भी हार्ट अटैक या फिर दिल संबंधी बीमारियों का संकेत हो सकता है. कई लोग इन समस्याओं को नजर अंदाज कर देते हैं जो बाद में मुसीबत का सबब बन सकता है

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पैरदर्द होना

अक्सर हम लोग अपने पैरों में होने वाले दर्द को अनदेखा कर देते हैं, लेकिन कई बार पैरों का दर्द दिल के कमजोर होने का भी संकेत हो सकता है. आप अगर चलने के दौरान पिंडली में क्रैंपिंग या जकड़न महसूस करें तो इसे नज़रअंदाज न करें

जबड़ा और पीठ में दर्द

प्रोफेसर न्यूबाई के अनुसार ‘हार्ट अटैक के साथ जबड़े और पीठ में भी दर्द महसूस हो सकता है. अगर दर्द नहीं जाता है तो आपको तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.’

हार्ट की तकलीफ के लिए अनमोल हेल्थ केयर में फ्री ECG ब्ल्डप्रेशर की जांच, परामर्श सलाह औऱ 7 दिन की दवा निःशुल्क दी जा रही है आप अपनी समस्या अनुरूप मिल कर जांच करा सकते है, रजिस्टर करने के लिए नीले शब्दों पर क्लिक करें

इस स्थिति में डॉक्टर की लें सलाह

आपको अगर हार्ट फेल के लक्षण या संकेत नजर महसूस हों तो डॉक्टर को दिखाने में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए. सही समय पर इलाज मिलने से बहुत हद तक स्थिति पर काबू किया जा सकता है. अनमोल हेल्थ केयर के डॉ हलधर पटेल सर के अनुसार इन स्थितियों में डॉक्टर की तत्काल सलाह लें

जब भी इस तरह के लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए. हो सकता है कि ये हार्ट फेल होने के लक्षण हों या फिर दिल या फेफड़ों से जुड़ी किसी अन्य गंभीर बीमारी के भी ये संकेत हो सकते हैं.

सीने में दर्द

बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना

दिल की धड़कन बढ़ जाना या अनियमित होना

अचानक सांस लेने में तकलीफ होना

इलेक्ट्रो होम्योपैथी में समय रहते इसका बहुत ही अच्छा उपचार मौजूद है जिसे आप लेकर स्वस्थ रह सकते हैं , अपनी समस्या अनुरूप मिल कर जांच करा सकते है, अपनी समस्या बताने के यहाँ नीले शब्दो मे क्लिक करे

ECG- Electro cardio diagram एक टेस्ट के तौर पर होता है, जो आमतौर पर आपके दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को जांचने के लिए किया जाता है।

जहां आपको यह जानकारी दे दे कि सामान्य विद्युत गतिविधि, आपको यह इशारा करती है, कि आपका ह्रदय सामान्य स्थिति से काम कर रहा है।

यह प्रक्रिया के माध्यम से दिल की विद्युत गतिविधि को कागज पर लाइन ट्रेसिंग के रूप में दर्शाता है, जो एक वेव के समान नजर आती है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि ईसीजी Electro cardio diogram टेस्ट कराने से पहले आप को इस बात का बिल्कुल खास खयाल रखना है, कि जिस दिन भी आपको  Electro cardio diogram  करानी है,

उस दिन आप अपने शरीर पर कोई चिकना क्रीम या लोशन ना लगाएं,क्योंकि बताया जाता है कि त्वचा पर चिकनाहट आने से इलेक्ट्रोड त्वचा के संपर्क में नहीं आ पाता है।

आप एक महत्वपूर्ण बात भी जान ले कि इसीजी की प्रक्रिया करने से पहले ठंडे पानी ना पिए और ना ही एक्सरसाइज करें, क्योंकि ठंडे पानी के कारण इस टेस्ट को रिकॉर्ड करने में इलेक्ट्रिकल पैटर्न में परिवर्तन आ सकता है।

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जहां एक्सरसाइज से आपकी हृदय की गति बढ़ जाती है, जो आपके टेस्ट के रिजल्ट को काफी रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

अगर आपके दिल में खराबी है, या किसी तरह की कोई परेशानी है, तो इस प्रक्रिया को किया जाता है, जो कि एक रिस्क रहित प्रक्रिया मानी जाती है।

यह आपके शरीर जैसे हाथ, पैर या छाती पर विशेष स्थानों पर इलेक्ट्रोड रखकर किया जाता है।

हमें ईसीजी की जरूरत इन महत्वपूर्ण बातों का पता लगाने के लिए होती है,

  • दिल के कक्षों की दीवारों की मोटाई
  • हृदय का एक ओर बढ़ जाना
  • आसामान हृदय की लय
  • अतीत में दिल का दौरा
  • सीने में दर्द के कारण कोलेस्ट्रोल का जमा होना
  • मधुमेह, उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति

ईसीजी आपके दिल की विद्युत गतिविधि की एक तस्वीर को रिकॉर्ड करने में सक्षम है, लेकिन यह केवल उस वक्त संभव हो सकता है, जिस वक्त आपको मानीटर किया जा रहा हो।

दिल कमज़ोर हो रहा हो तो महसूस होने लगते हैं ये लक्षण, डॉक्टर की जरूर लेनी चाहिए सलाह, इलेक्ट्रो होम्योपैथी है विकल्प (👈 इसे भी पढ़े)

इस प्रक्रिया के माध्यम से आपके हृदय से जुड़ी सारी बातों का पता चल जाता है।

जैसे कि अतीत में दिल का दौरा होना, छाती में दर्द के कारण, सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानी जिससे आप जूझ रहे हैं, तो फिर आपके स्वास्थ्य के लिए ईसीजी का करना काफी जरूरी माना जाता है

ई सी जी है आवश्यक

दिल का दौरा पड़ना

इसके दुष्परिणामों में यह देखा जाता है कि मरीजों को दिल का दौरा पड़ने से रक्त के प्रवाह में रुकावट होती है, जिसकी वजह से हृदय के टिशु में ऑक्सीजन की कमी और मृत्यु होने की भी ढेरों चांसेस होते हैं।

दिल के आकार में कमी

यह संकेत देता है कि दिल के वाल्व एक दूसरे से बड़े हैं साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि हृदय रक्त पेप करने के लिए सामान्य से ज्यादा मेहनत कर रहा है।

इलेक्ट्रोलाइट मैसेज लेना

यह वैसे उपकरण होते हैं जो शरीर में चलते हैं जो हमारे हृदय की मांसपेशियों की लय को बरकरार रखता है।

पोटेशियम कैल्शियम और मैग्नीशियम एक ऐसे इलेक्ट्रोलाइट है जिसकी जरूरत हमारे शरीर को होती है।

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दिल के रिदम में असमानताए

यह बात सबको पता है कि दिल आमतौर पर एक बैलेंस रिदम में धड़कता है।

अगर दिल आउट ऑफ बीट के सीक्वेंस में धड़कता है तो इस बदलाव को ईसीजी प्रकट कर सकता है।

अक्सर लोगों के मन में यह धारणा बनी रहती है कि ईसीजी टेस्ट बहुत महंगा होता है।

पर आपको बता दें कि ऐसा कुछ नहीं है, ना तो यह बहुत ज्यादा महंगा होता है, ना ही टेस्ट करवाते समय किसी तरह की कोई शारीरिक दर्द महसूस होती है।

अनमोल हेल्थ केयर में ईसीजी की सुविधाओ के साथ साथ QRMA, Digital Nadi Device , KOREAN Frequency Testing की सुविधाएं भी उपलब्ध है

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कुछ लोगों को इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग का सेवन पूरी तरह से अवॉइड करना चाह‍िए। इंटरम‍िटेंट फास्‍टि‍ंंग में ब्‍लड शुगर लेवल काफी घट जाता है क्‍योंक‍ि इस फास्‍ट में करीब 10 से 12 घंटे भूखा रहना होता है ज‍िसके कारण ये हर व्‍यक्‍त‍ि के ल‍िए उतना कारगर साब‍ित नहीं हो सकता। कई ऐसे लोग हैं ज‍िन्‍हें इंटरम‍िटेंट फास्‍‍ट‍िंग अवॉइड करना चाह‍िए जैसे ज‍िन लोगों को डायब‍िटीज है उन्‍हें खासकर इसका सेवन नहीं करना चाह‍िए। इस लेख में हम जानेंगे क‍ि क‍िन लोगों को इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग फॉलो करना अवॉइड करना चाह‍िए

अगर इम्‍यून‍िटी कमजोर है तो न करें इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग

(Avoid intermittent fasting if you have a weak immunity) 

अगर आपकी रोग प्रत‍िरोधक क्षमता कमजोर है तो आपको इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग अवॉइड करना चाह‍िए। ज्‍यादातर लोगों को सही लीन बॉडी मास मेनटेन करके रखना होता है और रोग प्रत‍िरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय पर गौर करना चाह‍िए वहीं अगर आपकी इम्‍यून‍िटी वीक है तो आपको इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग नहीं करना चाह‍िए। ज‍िन लोगों की इम्‍यून‍िटी वीक है उन्‍हें इसके ल‍िए पहले डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए

अन‍िद्रा की समस्‍या है तो न करें इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग

अगर आपको अन‍िद्रा की समस्‍या है तो इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग न करें। अगर आप भूखे पेट सोएंगे और आपको अन‍िद्रा की समस्‍या पहले से है तो आपको और ज्‍यादा परेशानी हो सकती है। अगर कई घंटों से आपने कुछ खाया नहीं है तो आपका ब्‍लड शुगर लेवल ग‍िर चुका होगा ज‍िसके कारण आपको रात में अन‍िद्रा की समस्‍या हो सकती है। अगर आप बहुत कम समय के ल‍िए सोएंगे तो आप सही वेट मेनटेन नहीं कर पाएंगे और ओवरवेट के लक्षण नजर आने लगेंगे जबक‍ि इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग को वजन कम करने के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।

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डायब‍िटीज है तो इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग न करें

(Avoid intermittent fasting if you have diabetes) 

अगर आपको डायब‍िटीज है तो आपको इंंटरमि‍टेंट फास्‍ट‍िंंग पूरी तरह से अवॉइड करना चाह‍िए। अगर आपको डायब‍िटीज है और आप कई घंटों तक ब‍िना खाए रहेंगे इससे आपकी बॉडी का शुगर लेवल लो हो जाएगा। डायब‍िटीज लो होने पर आपको घबराहट, जी म‍िचलाने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं, इन लक्षणों से बचने के ल‍िए आप डायब‍िटीज होने पर इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग  न करें।

प्रेगनेंसी में अवॉइड करें इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग (Avoid intermittent fasting if you are pregnant)

diabetes

अगर आप गर्भवती हैं तो आपको इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंंग का सेवन पूरी तरह से अवॉइड करना चाह‍िए। प्रेगनेंसी के दौरान या प्रेगनेंसी के बाद ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग की सलाह डॉक्‍टर नहीं देते हैं। इससे नवजात श‍िशु या गर्भस्‍थ श‍िशु की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है। आपको प्रेगनेंसी के बाद और उस दौरान क‍िसी भी तरह के फास्‍ट को पूरी तरह से अवॉइड करना चाह‍िए।  

डॉ हलधर से ठीक हुए मरीज का फीडबैक सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

अगर आप दवा खा रहे हैं तो अवॉइड करें इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग

(Avoid intermittent fasting if you are on medication) 

अगर आप क‍िसी भी तरह की दवा का सेवन करते हैं तो आपको इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग को पूरी तरह से अवॉइड करना चाह‍िए। कुछ दवाएं हैं ज‍िनके साथ आप भूखे नहीं रह सकते, आपको उन दवाओं के सेवन के साथ कुछ न कुछ खाना ही होगा जबक‍ि इंटरम‍िटेंट फास्‍ट‍िंग में 10 से 12 घंटे कुछ भी खाया नहीं जाता है। अगर आप खाली पेट दवा का सेवन करेंगे तो आपको जी म‍िचलाहट की समस्‍या, स‍िर में दर्द आद‍ि लक्षण नजर आने लगेंगे।    

सायटिका का उपचार इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की दवाइयों और थेरेपी के द्वारा संभव है जाने पूरी जानकारी

इन 5 तरह के लोगों को इंटरम‍िंटेंट फास्‍ट‍िंंग पूरी से अवॉइड करना चाह‍िए, अगर आपको फास्‍ट‍िंग करनी है तो थोड़े कम घंटों के ल‍िए भी इसे अपनाया जा सकता है।  

उपवास के फायदे – Benefits of Fasting in Hindi

  • शरीर को डिटॉक्सीफाई करे उपवास के फायदे में शरीर को साफ करना शामिल है। …
  • वजन कम करे …
  • पाचन तंत्र के लिए उपवास के फायदे …
  • त्वचा के लिए उपवास …
  • ब्लड प्रेशर के लिए उपवास …
  • कोलेस्ट्रॉल को कम करें …
  • ब्लड शुगर कम करने के लिए उपवास …
  • इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उपवास

अल्जाइमर और डिमेंशिया में क्या अंतर है, समझिए इनके लक्षण

आंतरायिक उपवास से जुड़े कई स्वास्थ्य जोखिम हैं।

जो लोग उपवास करते हैं वे आमतौर पर निर्जलीकरण का अनुभव करते हैं , मुख्यतः क्योंकि उनके शरीर को भोजन से कोई तरल पदार्थ नहीं मिल रहा है। जैसे, यह अनुशंसा की जाती है कि रमजान के दौरान, उपवास की अवधि से पहले मुसलमान खूब पानी का सेवन करें। उपवास आहार का पालन करने वाले अन्य व्यक्तियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपवास अवधि के दौरान वे ठीक से हाइड्रेटेड हों।

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अगर आप बीच-बीच में नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का खाना और नाश्ता करने के आदी हैं, तो उपवास की अवधि एक बड़ी चुनौती हो सकती है। जैसे, उपवास तनाव के स्तर को बढ़ा सकता है और नींद को बाधित कर सकता है। उपवास के दौरान निर्जलीकरण, भूख या नींद की कमी से भी सिरदर्द हो सकता है ।

दौड़ते समय फूलने लगती है सांस? खोज रहें हैं Stamina बढ़ाने के उपाय, तो आज से ही खाने में सम्मिलित करें ये 5 आहार

उपवास भी नाराज़गी पैदा कर सकता है; भोजन की कमी से पेट के एसिड में कमी आती है, जो भोजन को पचाता है और बैक्टीरिया को नष्ट करता है। लेकिन उपवास के दौरान भोजन को सूंघना या उसके बारे में सोचना भी मस्तिष्क को पेट में अधिक एसिड पैदा करने के लिए कहने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे नाराज़गी हो सकती है ।

जबकि कई पोषण विशेषज्ञ दावा करते हैं कि आंतरायिक उपवास वजन कम करने का एक अच्छा तरीका है, कुछ स्वास्थ्य पेशेवरों का मानना ​​​​है कि ऐसा आहार लंबे समय तक वजन घटाने के लिए अप्रभावी है।

यदि आप कोई करसत नहीं करते हैं पर रोज दौड़ते हैं तो आप फिट हैं। लेकिन दौड़ने के लिए भी आपका फिट रहना जरूरी है। दौड़ने के लिए स्टेमिना का होना बहुत जरूरी है। यदि आप थोड़ी दूर दौड़ने में ही हांफने लगते हैं, तो आपको कुछ विशेष तरह के फूड को अपने आहार में शामिल करने की जरूरत है

अल्जाइमर और डिमेंशिया में क्या अंतर है, समझिए इनके लक्षण (इसे भी पढ़े)

स्टेमिना शक्ति और ऊर्जा है जो आपको लंबे समय तक शारीरिक या मानसिक कार्यों को करने की अनुमति देती है। जब आप कोई गतिविधि कर रहे हों तो अपनी सहनशक्ति बढ़ाने से आपको असुविधा या तनाव सहने में मदद मिलती है। यह थकान और थकावट को भी कम करता है।

जब आप अपना वजन कम (Weight Loss) करने की कोशिश कर रहें हों तो दौड़ना (Running) व्यायाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। अधिकांश लोग दूसरे किसी कसरत करने के ऊपर दौड़ने को प्राथमिकता ज्यादा देते हैं। क्योंकि यह इसमें ज्यादा गणित नहीं लगाना पड़ता है। नाही किसी तरह के उपकरण की आवश्यकता पड़ती है। वैसे, ट्रेनर मानते हैं कि दौड़ने के लिए अच्छे क्वालिटी वाले जूते बहुत जरूरी हैं, लेकिन लोग अपनी सुविधानुसार ही दौड़ने निकल जाते हैं। कुछ लोग तो खाली पैर भी दौड़ते हैं। लेकिन हम यहां आज जूतों की बात नहीं आपके रनिंग स्टेमिना की करने वाले हैं। क्योंकि आपको तेज दौड़ने और लंबी दूरी तय करने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले पोषण की आवश्यकता जूतों से ज्यादा होती है।

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तो चलिए जानते हैं, स्टेमिना बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए

ब्राउन राइस

जिससे इसे पचाने में सफेद चावल से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में यह आपके पेट को अधिक समय तक भरा रखता है। जो आपके बॉडी के स्टेमिना को भी बनाए रखने में मदद करता है।

वॉक करते वक्त सिर्फ ये चेंज आपकी उम्र को बढ़ा सकते हैं 20 साल! (इसे भी पढें)

केला

एक्सरसाइज से पहले केले का सेवन आपको अच्छी उर्जा देता है। केला फाइबर से भरपूर होता है और कार्बोहाइड्रेट का बहुत अच्छा स्रोत होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि दौड़ से पहले किसी भी स्पोर्ट्स ड्रिंक का सेवन करने से केले का सेवन करना बेहतर होता है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि केला खाने से अन्य स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जैसे कि यह विटामिन बी 6 और एंटीऑक्सीडेंट के स्तर को बढ़ाता है। पीला फल आपको उच्च पोटेशियम सामग्री के कारण निर्जलीकरण और ऐंठन से भी बचाता है।

पालक

थकान का सबसे बड़ा कारण पोषक तत्वों की कमी है। तेज दौड़ने और अधिक दूरी तय करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर भोजन का सेवन करना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में शुरुआत आप पालक से कर सकते हैं। पालक में विटामिन ए, सी, ई, के और सबसे महत्वपूर्ण आयरन मौजूद होता है। जो आपको फिट रहने में फायदेमंद साबित हो सकता है।

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ओट्स

यदि आप सुबह लंबी दौड़ के लिए जा रहे हैं, तो ओट्स का सेवन करें क्योंकि यह अच्छे कार्ब्स से भरपूर होता है। ज्यादातर कार्ब्स को वजन घटाने के लिए खराब माना जाता है, लेकिन यह सभी मामलों में सच नहीं है। सभी कार्ब्स खराब नहीं होते हैं, आपको बस सही कार्ब्स को चुनने की जरूरत है। ओट्स में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और वजन घटाने के लिए इसे बेहतरीन फूड माना जाता है। यह ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही आपको लंबे समय तक ऊर्जावान और भरा हुआ रखता है।

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वॉकिंग यानी चलना एक ऐसा शारीरिक अभ्यास है, जो आपकी सेहत और संपूर्ण स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाने का काम करता है। सुबह उठकर हल्के-फुल्के कदम से रोजाना चलना ढेर सारे फायदों की एक वजह है, जो आपके बॉडी फैट को कम करती है, हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाता है, एनर्जी लेवल बढ़ता है, टेंशन का लेवल कम हो जाता है और इम्यूनिटी के साथ-साथ संतुलन और कोर्डिनेशन को भी बेहतर बनाता है।

एक शोध में ये सामने आया है कि चलने के तरीके से भी आप ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे करें अपने वॉकिंग के स्टाइल में बदलाव।

हमें मिनरल्स क्यों चाहिये.? हमें इनकी प्रतिदिन की आवश्यकता होती है।

अगर आपको ये फायदे भी कम लग रहे हैं तो लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी में ये बताया है कि दिन में कम से कम 10 मिनट चलना आपकी उम्र बढ़ा सकता है। अपने चलने की गति को बढ़ाकर आप धीमे चलने वाले लोगों की तुलना में 20 साल तक अपनी उम्र को बढ़ा सकता है। इस मजे के फायदे को दिमाग में रखकर आप अगली सुबह जूते पहनिए और इन स्मार्ट तरीकों को अपनाकर अपने चलने के फायदों को ले सकते हैं।

हल्का भार उठाएं

अगर आपको ये चुनौती भरा काम नहीं लगता तो ये आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। बहुत से लोगों के लिए चलने जितना आसान कोई दूसरा काम नहीं है। इसलिए अगर आपको चलना पसंद है तो आप बड़ी फील्ड का चुनाव कर सकते हैं। इसके साथ ही आप कुछ चुनौती भरे काम भी कर सकते हैं। आप अपनी साधारण वॉक को पावर वॉक बना सकते हैं, जिसमें आपको हाथों में सिर्फ हल्का भार लेकर चलने की जरूरत है। ये आपकी बॉडी को थोड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा और आप अधिक कैलोरी बर्न कर पाएंगे। इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा भार न उठाएं क्योंकि ये गर्दन और कंधे की चोट का भी कारण बन सकता है।

अल्जाइमर और डिमेंशिया में क्या अंतर है, समझिए इनके लक्षण

वॉकिंग स्पीड के विकल्प

वॉक करने जैसी क्लासिक शारीरिक गतिविधि कोई दूसरी नहीं है। इसमें बदलाव की बात करें तो आप गति को बढ़ाकर भी इसे इंटेंस बना सकते हैं। ये पावर वॉक आपके शरीर को चुनौती देता है और आपके हार्ट रेट को बढ़ाने का काम करता है। इसकी मदद से आपको अधिक कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। अगर आप अपनी वॉक स्पीड से कंफर्टेबल नहीं हैं तो सिर्फ अपनी नार्मल स्पीड वॉक में 20 सेकेंड तेज चलने की कोशिश करें।

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दिन में एक बार से ज्यादा चलें

अगर आप वॉक पर जा रहे हैं तो अच्छा है लेकिन दिन में दो बार तक चलना और भी अच्छा साबित हो सकता है। दिन में अपनी वॉक की संख्या को बढ़ाने से आपको अपनी रोजाना की गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही स्टेप काउंट भी बढ़ जाता है। ये न सिर्फ आपको एक बार में चलकर थकने से बचाता है बल्कि आपकी स्ट्रेंथ को भी बढ़ाता है। दिन में दो बार तक चलने के लिए आप लंच और रात के खाने के बीच का समय निकाल सकते हैं। ये और भी फायदेमंद हो जाता है जब आप खाना खाने के बाद चलते हैं, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।

अल्जाइमर और डिमेंशिया (Dementia And Alzheimer In Hindi) दोनों ही न्यूरोलॉजिकल विकार है। इन दोनों ही बीमारियों में उम्र बढ़ने के साथ ही बदलाव देखे जाते हैं। यादाश्त का कमजोर होना सोचने समझने में दिक्कतों का सामना करना, महत्वपूर्ण बदलावों में से एक हैं। इसके ज्यादातर लक्षण एक जैसे होने के कारण या पहचान पाना मुश्किल होता है कि किसी व्यक्ति को अल्जाइमर है या डिमेंशिया।

अल्जाइमर और डिमेंशिया में क्या अंतर – (Difference Between Dementia And Alzheimer In Hindi)

डिमेंशिया एक ऐसी टर्म है जिसका प्रयोग ऐसे डिसऑर्डर की व्याख्या करने के लिए किया जाता है जिसमें दिमाग पर प्रभाव पड़ा हो जैसे याददाश्त, व्यवहार, सोच विचार करने की क्षमता, जज्बात आदि। दूसरे शब्दों में अगर मरीज की कॉग्निटिव हेल्थ (सोचने-समझने की शक्ति) पहले से कमजोर है, जिस कारण उसकी रोजाना की गतिविधियां प्रभावित हो रही हो तो इसे ही डिमेंशिया कहा जाता है।

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वहीं, अल्जाइमर बीमारी डिमेंशिया का सबसे प्रमुख प्रकार है। अन्य प्रकारों में वैस्कुलर डिमेंशिया, पार्किंसन डिजीज डिमेंशिया, फ्रंट टेंपोरल डिमेंशिया आदि शामिल हैं। अन्य प्रकार का डिमेंशिया मिक्सड डिमेंशिया कहलाता है जिसमें अल्जाइमर और वैस्कुलर के लक्षण मिले हुए होते हैं।

अल्जाइमर के लक्षण – (Alzheimer’s Symptoms In Hindi)

अल्जाइमर के मरीजों में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जैसे

  • एक ही प्रश्न और बयान को बार-बार दोहराना या पूछना
  • किसी के साथ हुई बातचीत, कोई इवेंट या अपॉइंटमेंट को भूल जाना
  • किसी भी सामान को उस जगह के बजाय गलत जगह पर रख देना, सामान जहां पहले रखा था
  • जानी पहचानी जगह को भूल जाना
  • वस्तुओं की पहचान करने अपने विचारों को व्यक्त करने बातचीत में हिस्सा लेने के लिए सही शब्द खोजने में परेशानी होना

क्रिएटिनिन क्या है.? इसकी अधिकता से किडनी क्यों डैमेज होने लगती है.? जानिए शरीर में कितना होना चाहिए क्रिएटिनिन लेवल (इसे भी पढ़ें)

डिमेंशिया के लक्षण – (Dementia Symptoms In Hindi)

डिमेंशिया के लक्षण कारणों के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं जैसे:

  • याददाश्त में कमी, जो आमतौर पर कोई दूसरा व्यक्ति नोटिस करता है
  • बातचीत करने या तर्क करने में कठिनाई होना
  • कठिन कामों को करने में कठिनाई होना
  • किसी चीज की योजना बनाने या आयोजन करने में परेशानी
  • हमेशा कंफ्यूज रहना
  • पर्सनालिटी में बदलाव
  • डिप्रेशन
  • चिंता
  • घबराहट
  • पागलपन
  • बुरे सपने
  • गलत व्यवहार

सायटिका का उपचार इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की दवाइयों और थेरेपी के द्वारा संभव है जाने पूरी जानकारी (इसे भी पढ़े)

जब भी डिमेंशिया या अल्जाइमर के लक्षण दिखें तो तुरंत आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। किसी भी प्रकार के मानसिक विकार को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, और न ही किसी भी पेशेंट के साथ होने वाली इन घटनाओं का मजाक नहीं बनाना चाहिए बल्कि उसे चिकित्सक से मिलने की सलाह देनी चाहिए। इस प्रकार की समस्या किसी के साथ भी हो सकती है।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी में डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर दोनों का उचित व्यस्थापन देखा जा रहा है, लोग इसमे जल्दी ही ठीक हो रहे हैं, जिससे इस पद्धति के प्रति लोगों की आस बढ़ी है

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क्रिएटिनिन हमारे शरीर का एक ऐसा उत्पाद है जो ज्यादातर मांसपेशियों के टूटने से बनता है।

बता दें कि हर किसी के खून में क्रिएटिनिन की होता है।

बता दें हमारे शरीर में ज्यादातर क्रिएटिनिन को ब्लड सर्कुलेशन को किडनी के जरिये फिल्टर किया जाता है।

हमारे खून में क्रिएटिनिन की मात्रा स्थिर रहती है।

क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ स्तर किडनी को खराब कर देता है।

यह एक नेचुरल रसायन होता है।

अल्सर का इलेक्ट्रोहोम्योपैथी में है सुगम उपचार 👈👈 इसे भी पढ़े

क्रिएटिनिन का स्तर शरीर में कम होना चाहिए।

क्रिएटिनिन लेवल कितना होना चाहिए.?

बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन सीधा किडनी पर असर करता है।

बहुत सारे किडनी रोगियों को प्रति सप्ताह डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है डायलिसिस कराने का अर्थ यह है कि खून की सफाई कराना। खून की सफाई मशीनों द्वारा की जाती है इसे डायलिसिस कहते हैं यह प्रक्रिया काफी खर्चीली और तकलीफ देह होती है।

पुरुषों में 0.6 से लेकर 1.2 मिलीग्राम होता है।

हर किसी के शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर अलग-अलग होता है।

महिलाओं में 0.5 से 1.0 मिलीग्राम

किशोर की बात करें तो उनमें 0.5 से लेकर 1.0 मिलीग्राम क्रिएटिनिन का स्तर होना जरूरी है।

बच्चों में 0.3 से 0.7 मिलीग्राम क्रिएटिनिन का स्तर होना जरूरी है ।

 इन 5 बीमारी वाले लोगों को रहता है ज्यादा खतरा…

अगर आपको

1. डायबिटीज,

2. हाई ब्लड प्रेशर और

3. इम्युनिटी हद से ज्यादा कमजोर है।

4. और पहले कभी किडनी से जुड़ी कोई बीमारी हो चुकी है।

5. या फिर शरीर में ऑटोइम्यून विकार है।

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क्रिएटिनिन कम कैसे करे?

आयुर्वेद के ज्ञानियों का कहना है कि क्रिएटनीन लेवल ज्यादा बढ़ने से किडनी से रक्त की सफाई बंद हो जाती है फिर इसके लिए डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजरना होता है।

….. इन सभी परेशानियों से बचने के लिए शारीरिक श्रम ज्यादा से ज्यादा करें इस तरह से ब्लड सर्क्युलेशन भी सही रहेगा। लेकिन इसके बाद भी अगर क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ता है, तो आयुर्वेदिक दवा और उपचारों की मदद से इसे कम करने की सलाह देते हैं, क्योंकि अंग्रेजी दवाइयों में क्रिएटनीन लेबल कम करने की कोई भी दवा नहीं है। आयुर्वेद पद्धति से आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा उपचार करने से ही यह जल्द ही लेवल में आ जाता है।

आधुनिक मशीनों द्वारा हो रही अब हमारे केंद्र में थेरेपी, जल्द ही संपर्क करें अब केंद्र पर

विशेष सावधानियां

1. कम करें प्रोटीन का सेवन

पोषक तत्वों में प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन का सेवन क्रिएटिनिन के स्तर को बढ़ा सकता है।

2. ज्यादा से ज्यादा लें फाइबर

फाइबर हमारे पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इससे पाचन बेहतर बना रहता है। शोधकर्ताओं की मानें तो फाइबर का ज्यादा सेवन करने से बढ़े हुए क्रिएटिनिन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। 

3. ज्यादा से ज्यादा पिएं पानी

क्योंकि जरूरत से कम पानी पीने से शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर बढने लगता है!

4. कम कर दें नमक का सेवन

ज्यादा नमक सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर की समस्या हो जाती है। जो सीधा किडनी पर असर करती है।

अल्सर:-


परिचय:

पेट के श्लेष्मकला अस्तर जब क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो उसके कारण अम्लों का जरूरत से ज्यादा स्राव होने लगता है जिसके कारण पेट में अल्सर रोग हो जाता हैं। श्लेष्मा झिल्ली के पेट में क्षतिग्रस्त होने पर गैस्ट्रिक अल्सर तथा डुओडेन क्षतिगस्त होने पर इसे डुओडेनल अल्सर कहते हैं।



अल्सर रोग का लक्षण:-



1. जब किसी व्यक्ति को अल्सर रोग हो जाता है तो रोगी के पेट में जलन तथा पेट में दर्द होने लगता है।

2. अल्सर रोग से पीड़ित व्यक्ति जब भोजन जल्दबाजी में करता है तो उसके कुछ देर बाद उसके पेट में दर्द होना बंद हो जाता है। कभी-कभी भोजन करने के बाद दर्द थोड़ा कम हो जाता है लेकिन फिर भी थोड़ा-थोड़ा दर्द होता रहता है।

3. अल्सर रोग से पीड़ित रोगी जब भोजन करने में जल्दबाजी में करता है या चिंता-फिक्र अधिक करता है या फिर चिकनाई युक्त भोजन करता है तो इस रोग की अवस्था और भी बिगड़ने लगती है।



अल्सर रोग होने का कारण :-



खान-पान सम्बन्धित गलत आदतें तथा भोजन करने का समय सही न होने के कारण अल्सर रोग हो जाता है।
अधिक उत्तेजक पदार्थ युक्त भोजन, तेज मसालेदार भोजन, चाय तथा कॉफी सेवन करने से अल्सर रोग हो सकता है।
शराब पीने, ध्रूमपान करने या तंबाकू का सेवन करने के कारण भी अल्सर रोग हो सकता है।
शारीरिक, भावात्मक या मनोवैज्ञानिक तनाव होने के कारण भी अल्सर रोग व्यक्ति को हो सकता है।



अल्सर रोग का इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा से उपचार:-



अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए तथा इसके बाद इसका इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।


अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले भोजन करने का समय बनाना चाहिए तथा इसके बाद उत्तेजक पदार्थ, मिर्च मसालेदार भोजन, मांसाहारी पदार्थ प्रयोग न करें

आप अनमोल हेल्थ केयर में संपर्क करके अपना उपचार ले सकते हैं

Dr. Haldhar Sir And Team 9098472777

जिंदगी बचाने के अचूक तरीके :

गले में कुछ फँस जाए- तब केवल अपनी भुजाओं को ऊपर उठाएं

एक बच्चे की 56 वर्षीय दादी घर पर टेलीविज़न देखते हुए फल खा रही थी। जब वो अपना सर हिला रही थी तब अचानक एक फल का टुकड़ा उसके गले में फँस गया। उसने अपने सीने को बहुत दबाया पर कुछ भी फायदा नहीं हुआ।

जब बच्चे ने दादी को परेशान देखा तो उसने पूछा कि “दादी माँ क्या आपके गले में कुछ फँस गया है?” वो कुछ भी उत्तर नहीं दे पाई।

“मुझे लगता है कि आपके गले में कुछ फँस गया है। अपने हाथ ऊपर करो, हाथ ऊपर करो” |

दादी माँ ने तुरंत अपने हाथ ऊपर कर दिए और वो जल्द ही फँसे हुए फल के टुकड़े को गले से बाहर थूकने में कामयाब हो गयी।

उसके पोते ने बताया कि ये बात उसने अपने विद्यालय में सीखी है ।सुबह उठते वक्त होने वाले शरीर के दर्द

सुबह उठते वक्त होने वाले शरीर के दर्द

क्या आपको सुबह उठते वक्त शरीर में दर्द होता है? क्या आपको सुबह उठते वक्त गर्दन में दर्द और अकड़न महसूस होती है? यदि आपको ये सब होता है तो आप क्या करें?

तब आप अपने पांव ऊपर उठाएं। अपने पांव के अंगूठे को बाहर की तरफ खेंचे और धीरे धीरे उसकी मालिश करें और घड़ी की दिशा में एवं घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाए ।पांव में आने वाले बॉयटा या ऐठन

पांव में आने वाले बॉयटा या ऐठन

यदि आपके बाएँ पांव में बॉयटा आया है तो अपने दाएँ हाथ को जितना ऊपर उठा सकते हैं उठायें |

यदि ये बॉयटा आपके दाएँ पांव में आया है तो आप अपने बाएँ हाथ को जितना ऊपर ले जा सकते हैं ले जायें। इससे आपको तुरंत आराम आएगा।पांव का सुन्न होना

पांव का सुन्न होना

यदि आपका बायां पांव सुन्न होता है तो अपने दाएं हाथ को जोर से बाहर की ओर झुलायें या झटके दें। यदि आपका दायां पांव सुन्न है तो अपने बाऐं हाथ को जोर से बाहर की ओर झुलायें या झटका दें।आधे शरीर में लकवा

आधे शरीर में लकवा

एक सिलाई की सुई लेकर तुरन्त ही कानों की लोलिका के सबसे नीचे वाले भाग में सुई चुभा कर एक एक बूंद खून निकालें | इससे रोगी को तुरंत आराम आ जायेगा। उस पर से सब पक्षाघात के लक्षण भी मिट जायेंगे।ह्रदय आघात की वजह से हृदय का रुकना

ह्रदय आघात की वजह से हृदय का रुकना

ऐसे व्यक्ति के पांव से जुराबें उतार कर (यदि पहनी है तो) सुई से उसकी दसों पांव की उंगलियों में सुई चुभो कर एक एक बूंद रक्त की निकालें | इससे रोगी तुरन्त उठ जाएगा।यदि रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो

यदि रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो

चाहे ये दमा से हो या ध्वनि तंत्र की सूजन की वजह या और कोई कारण हो, जब तक कि रोगी का चेहरा सांस न ले पाने की वजह से लाल हो उसके नासिका के अग्रभाग पर सुई से छिद्र कर दो बून्द काला रक्त निकाल दें |

उपरोक्त सभी तरीकों से कोई खतरा नहीं है और ये केवल 10 सेकेंड में ही किये जा सकते हैं ।

आप सभी से निवेदन है,कि इस मैसेज को सुरक्षित (Save) करके रखलें…
आपातकाल (Emergency) मे काम आयेगा।
किसी की जान बचा सकते हो

For emergency cases        +91-9098472777