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शरीर को प्रतिदिन 84 मिनरल्स या खनिज लवण चाहिये क्योंकि हमारे मिनरल्स की आयु सिर्फ 24 घण्टे ही होती है इसीलिए हमें इनकी प्रतिदिन की आवश्यकता होती है।

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लेकिन सभी तुक्के लगाकर सेल्फमेड सलाहकार बनकर कुछ न कुछ खिलाये जा रहे हैं और रिज़ल्ट कुछ भी नहीं….
शरीर के लिए प्रतिदिन आवश्यक खनिज लवण, जिन्हें प्राकृतिक तरीके से पा सकते हैं।
केमिकल से बने मिनरल्स फायदा तो करते हैं परन्तु प् साइड इफेक्ट्स के साथ…..

खनिज लवणों के प्रमुख प्राकृतिक स्रोत…..

(1). कैल्शियम -CALCIUM दूध,  पालक, टमाटर, अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, ताजे फल

(2)फॉस्फोरस– PHOSPHORS दूध, अंकुरित अन्न , हरी सब्जी, ताजे अन्न। 

(3) पोटेशियम – POTASSIUM अंकुरित अन्न, हरी सब्जी। 

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(4). सोडियम – SODIUM पनीर, दूध, छेना, हरीसब्जी, ताजेफल। 

(5) क्लोरिन – CHLORINE सेंधा नमक, दूध, हरी सब्जी, अंकुरित अन्न।समुद्री नमक बिल्कुल नहीं।

(6). लोहा – IRON हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न, खुर्बानी, कालीदाक्ष, तिल, सेव, अंगूर। 

(7). मैंग्नीज -MANGANESE हरी सब्जियां, फल, अंकुरित अन्न। 

(8) तांबा – COPPER ताजी हरी सब्जियां, अंकुरित अन्न। 

(9). आयोडिन – IODINE सेंधा नमक, दूध, समुद्री- खाद्य पदार्थ।समुद्री नमक बिल्कुल नहीं।

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(10) फ्लोरिन – FLUORINE हरी सब्जी, फल, अंकुरित अन्न। 

(11). जस्ता – ZINK खमीर, अंकुरित गेहूं ,यीस्ट आदि। 

(12). कोबाल्ट – COBALT अंकुरित अन्न, जीवन्त आहार। 

(13)मोलिब्डनम् – MOLYBDENUM हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न। 

Collection of minerals. Iron ore, sandstone, apatite, quartz, bauxite, limonite, phosphorite, magnesite, gypsum, agate, asbestos, marble, corundum, kaolin and other minerals.

(14). सिलीकोन – SILICONE अनाज, हरी सब्जी, ताजे फल, जीवन्त आहार इत्यादि।

यदि आप कोई करसत नहीं करते हैं पर रोज दौड़ते हैं तो आप फिट हैं। लेकिन दौड़ने के लिए भी आपका फिट रहना जरूरी है। दौड़ने के लिए स्टेमिना का होना बहुत जरूरी है। यदि आप थोड़ी दूर दौड़ने में ही हांफने लगते हैं, तो आपको कुछ विशेष तरह के फूड को अपने आहार में शामिल करने की जरूरत है

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स्टेमिना शक्ति और ऊर्जा है जो आपको लंबे समय तक शारीरिक या मानसिक कार्यों को करने की अनुमति देती है। जब आप कोई गतिविधि कर रहे हों तो अपनी सहनशक्ति बढ़ाने से आपको असुविधा या तनाव सहने में मदद मिलती है। यह थकान और थकावट को भी कम करता है।

जब आप अपना वजन कम (Weight Loss) करने की कोशिश कर रहें हों तो दौड़ना (Running) व्यायाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। अधिकांश लोग दूसरे किसी कसरत करने के ऊपर दौड़ने को प्राथमिकता ज्यादा देते हैं। क्योंकि यह इसमें ज्यादा गणित नहीं लगाना पड़ता है। नाही किसी तरह के उपकरण की आवश्यकता पड़ती है। वैसे, ट्रेनर मानते हैं कि दौड़ने के लिए अच्छे क्वालिटी वाले जूते बहुत जरूरी हैं, लेकिन लोग अपनी सुविधानुसार ही दौड़ने निकल जाते हैं। कुछ लोग तो खाली पैर भी दौड़ते हैं। लेकिन हम यहां आज जूतों की बात नहीं आपके रनिंग स्टेमिना की करने वाले हैं। क्योंकि आपको तेज दौड़ने और लंबी दूरी तय करने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले पोषण की आवश्यकता जूतों से ज्यादा होती है।

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तो चलिए जानते हैं, स्टेमिना बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए

ब्राउन राइस

जिससे इसे पचाने में सफेद चावल से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में यह आपके पेट को अधिक समय तक भरा रखता है। जो आपके बॉडी के स्टेमिना को भी बनाए रखने में मदद करता है।

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केला

एक्सरसाइज से पहले केले का सेवन आपको अच्छी उर्जा देता है। केला फाइबर से भरपूर होता है और कार्बोहाइड्रेट का बहुत अच्छा स्रोत होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि दौड़ से पहले किसी भी स्पोर्ट्स ड्रिंक का सेवन करने से केले का सेवन करना बेहतर होता है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि केला खाने से अन्य स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जैसे कि यह विटामिन बी 6 और एंटीऑक्सीडेंट के स्तर को बढ़ाता है। पीला फल आपको उच्च पोटेशियम सामग्री के कारण निर्जलीकरण और ऐंठन से भी बचाता है।

पालक

थकान का सबसे बड़ा कारण पोषक तत्वों की कमी है। तेज दौड़ने और अधिक दूरी तय करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर भोजन का सेवन करना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में शुरुआत आप पालक से कर सकते हैं। पालक में विटामिन ए, सी, ई, के और सबसे महत्वपूर्ण आयरन मौजूद होता है। जो आपको फिट रहने में फायदेमंद साबित हो सकता है।

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ओट्स

यदि आप सुबह लंबी दौड़ के लिए जा रहे हैं, तो ओट्स का सेवन करें क्योंकि यह अच्छे कार्ब्स से भरपूर होता है। ज्यादातर कार्ब्स को वजन घटाने के लिए खराब माना जाता है, लेकिन यह सभी मामलों में सच नहीं है। सभी कार्ब्स खराब नहीं होते हैं, आपको बस सही कार्ब्स को चुनने की जरूरत है। ओट्स में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और वजन घटाने के लिए इसे बेहतरीन फूड माना जाता है। यह ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही आपको लंबे समय तक ऊर्जावान और भरा हुआ रखता है।

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वॉकिंग यानी चलना एक ऐसा शारीरिक अभ्यास है, जो आपकी सेहत और संपूर्ण स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाने का काम करता है। सुबह उठकर हल्के-फुल्के कदम से रोजाना चलना ढेर सारे फायदों की एक वजह है, जो आपके बॉडी फैट को कम करती है, हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाता है, एनर्जी लेवल बढ़ता है, टेंशन का लेवल कम हो जाता है और इम्यूनिटी के साथ-साथ संतुलन और कोर्डिनेशन को भी बेहतर बनाता है।

एक शोध में ये सामने आया है कि चलने के तरीके से भी आप ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे करें अपने वॉकिंग के स्टाइल में बदलाव।

हमें मिनरल्स क्यों चाहिये.? हमें इनकी प्रतिदिन की आवश्यकता होती है।

अगर आपको ये फायदे भी कम लग रहे हैं तो लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी में ये बताया है कि दिन में कम से कम 10 मिनट चलना आपकी उम्र बढ़ा सकता है। अपने चलने की गति को बढ़ाकर आप धीमे चलने वाले लोगों की तुलना में 20 साल तक अपनी उम्र को बढ़ा सकता है। इस मजे के फायदे को दिमाग में रखकर आप अगली सुबह जूते पहनिए और इन स्मार्ट तरीकों को अपनाकर अपने चलने के फायदों को ले सकते हैं।

हल्का भार उठाएं

अगर आपको ये चुनौती भरा काम नहीं लगता तो ये आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। बहुत से लोगों के लिए चलने जितना आसान कोई दूसरा काम नहीं है। इसलिए अगर आपको चलना पसंद है तो आप बड़ी फील्ड का चुनाव कर सकते हैं। इसके साथ ही आप कुछ चुनौती भरे काम भी कर सकते हैं। आप अपनी साधारण वॉक को पावर वॉक बना सकते हैं, जिसमें आपको हाथों में सिर्फ हल्का भार लेकर चलने की जरूरत है। ये आपकी बॉडी को थोड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा और आप अधिक कैलोरी बर्न कर पाएंगे। इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा भार न उठाएं क्योंकि ये गर्दन और कंधे की चोट का भी कारण बन सकता है।

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वॉकिंग स्पीड के विकल्प

वॉक करने जैसी क्लासिक शारीरिक गतिविधि कोई दूसरी नहीं है। इसमें बदलाव की बात करें तो आप गति को बढ़ाकर भी इसे इंटेंस बना सकते हैं। ये पावर वॉक आपके शरीर को चुनौती देता है और आपके हार्ट रेट को बढ़ाने का काम करता है। इसकी मदद से आपको अधिक कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। अगर आप अपनी वॉक स्पीड से कंफर्टेबल नहीं हैं तो सिर्फ अपनी नार्मल स्पीड वॉक में 20 सेकेंड तेज चलने की कोशिश करें।

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दिन में एक बार से ज्यादा चलें

अगर आप वॉक पर जा रहे हैं तो अच्छा है लेकिन दिन में दो बार तक चलना और भी अच्छा साबित हो सकता है। दिन में अपनी वॉक की संख्या को बढ़ाने से आपको अपनी रोजाना की गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही स्टेप काउंट भी बढ़ जाता है। ये न सिर्फ आपको एक बार में चलकर थकने से बचाता है बल्कि आपकी स्ट्रेंथ को भी बढ़ाता है। दिन में दो बार तक चलने के लिए आप लंच और रात के खाने के बीच का समय निकाल सकते हैं। ये और भी फायदेमंद हो जाता है जब आप खाना खाने के बाद चलते हैं, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।

अल्जाइमर और डिमेंशिया (Dementia And Alzheimer In Hindi) दोनों ही न्यूरोलॉजिकल विकार है। इन दोनों ही बीमारियों में उम्र बढ़ने के साथ ही बदलाव देखे जाते हैं। यादाश्त का कमजोर होना सोचने समझने में दिक्कतों का सामना करना, महत्वपूर्ण बदलावों में से एक हैं। इसके ज्यादातर लक्षण एक जैसे होने के कारण या पहचान पाना मुश्किल होता है कि किसी व्यक्ति को अल्जाइमर है या डिमेंशिया।

अल्जाइमर और डिमेंशिया में क्या अंतर – (Difference Between Dementia And Alzheimer In Hindi)

डिमेंशिया एक ऐसी टर्म है जिसका प्रयोग ऐसे डिसऑर्डर की व्याख्या करने के लिए किया जाता है जिसमें दिमाग पर प्रभाव पड़ा हो जैसे याददाश्त, व्यवहार, सोच विचार करने की क्षमता, जज्बात आदि। दूसरे शब्दों में अगर मरीज की कॉग्निटिव हेल्थ (सोचने-समझने की शक्ति) पहले से कमजोर है, जिस कारण उसकी रोजाना की गतिविधियां प्रभावित हो रही हो तो इसे ही डिमेंशिया कहा जाता है।

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वहीं, अल्जाइमर बीमारी डिमेंशिया का सबसे प्रमुख प्रकार है। अन्य प्रकारों में वैस्कुलर डिमेंशिया, पार्किंसन डिजीज डिमेंशिया, फ्रंट टेंपोरल डिमेंशिया आदि शामिल हैं। अन्य प्रकार का डिमेंशिया मिक्सड डिमेंशिया कहलाता है जिसमें अल्जाइमर और वैस्कुलर के लक्षण मिले हुए होते हैं।

अल्जाइमर के लक्षण – (Alzheimer’s Symptoms In Hindi)

अल्जाइमर के मरीजों में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जैसे

  • एक ही प्रश्न और बयान को बार-बार दोहराना या पूछना
  • किसी के साथ हुई बातचीत, कोई इवेंट या अपॉइंटमेंट को भूल जाना
  • किसी भी सामान को उस जगह के बजाय गलत जगह पर रख देना, सामान जहां पहले रखा था
  • जानी पहचानी जगह को भूल जाना
  • वस्तुओं की पहचान करने अपने विचारों को व्यक्त करने बातचीत में हिस्सा लेने के लिए सही शब्द खोजने में परेशानी होना

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डिमेंशिया के लक्षण – (Dementia Symptoms In Hindi)

डिमेंशिया के लक्षण कारणों के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं जैसे:

  • याददाश्त में कमी, जो आमतौर पर कोई दूसरा व्यक्ति नोटिस करता है
  • बातचीत करने या तर्क करने में कठिनाई होना
  • कठिन कामों को करने में कठिनाई होना
  • किसी चीज की योजना बनाने या आयोजन करने में परेशानी
  • हमेशा कंफ्यूज रहना
  • पर्सनालिटी में बदलाव
  • डिप्रेशन
  • चिंता
  • घबराहट
  • पागलपन
  • बुरे सपने
  • गलत व्यवहार

सायटिका का उपचार इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की दवाइयों और थेरेपी के द्वारा संभव है जाने पूरी जानकारी (इसे भी पढ़े)

जब भी डिमेंशिया या अल्जाइमर के लक्षण दिखें तो तुरंत आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। किसी भी प्रकार के मानसिक विकार को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, और न ही किसी भी पेशेंट के साथ होने वाली इन घटनाओं का मजाक नहीं बनाना चाहिए बल्कि उसे चिकित्सक से मिलने की सलाह देनी चाहिए। इस प्रकार की समस्या किसी के साथ भी हो सकती है।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी में डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर दोनों का उचित व्यस्थापन देखा जा रहा है, लोग इसमे जल्दी ही ठीक हो रहे हैं, जिससे इस पद्धति के प्रति लोगों की आस बढ़ी है

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क्रिएटिनिन हमारे शरीर का एक ऐसा उत्पाद है जो ज्यादातर मांसपेशियों के टूटने से बनता है।

बता दें कि हर किसी के खून में क्रिएटिनिन की होता है।

बता दें हमारे शरीर में ज्यादातर क्रिएटिनिन को ब्लड सर्कुलेशन को किडनी के जरिये फिल्टर किया जाता है।

हमारे खून में क्रिएटिनिन की मात्रा स्थिर रहती है।

क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ स्तर किडनी को खराब कर देता है।

यह एक नेचुरल रसायन होता है।

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क्रिएटिनिन का स्तर शरीर में कम होना चाहिए।

क्रिएटिनिन लेवल कितना होना चाहिए.?

बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन सीधा किडनी पर असर करता है।

बहुत सारे किडनी रोगियों को प्रति सप्ताह डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है डायलिसिस कराने का अर्थ यह है कि खून की सफाई कराना। खून की सफाई मशीनों द्वारा की जाती है इसे डायलिसिस कहते हैं यह प्रक्रिया काफी खर्चीली और तकलीफ देह होती है।

पुरुषों में 0.6 से लेकर 1.2 मिलीग्राम होता है।

हर किसी के शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर अलग-अलग होता है।

महिलाओं में 0.5 से 1.0 मिलीग्राम

किशोर की बात करें तो उनमें 0.5 से लेकर 1.0 मिलीग्राम क्रिएटिनिन का स्तर होना जरूरी है।

बच्चों में 0.3 से 0.7 मिलीग्राम क्रिएटिनिन का स्तर होना जरूरी है ।

 इन 5 बीमारी वाले लोगों को रहता है ज्यादा खतरा…

अगर आपको

1. डायबिटीज,

2. हाई ब्लड प्रेशर और

3. इम्युनिटी हद से ज्यादा कमजोर है।

4. और पहले कभी किडनी से जुड़ी कोई बीमारी हो चुकी है।

5. या फिर शरीर में ऑटोइम्यून विकार है।

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क्रिएटिनिन कम कैसे करे?

आयुर्वेद के ज्ञानियों का कहना है कि क्रिएटनीन लेवल ज्यादा बढ़ने से किडनी से रक्त की सफाई बंद हो जाती है फिर इसके लिए डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजरना होता है।

….. इन सभी परेशानियों से बचने के लिए शारीरिक श्रम ज्यादा से ज्यादा करें इस तरह से ब्लड सर्क्युलेशन भी सही रहेगा। लेकिन इसके बाद भी अगर क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ता है, तो आयुर्वेदिक दवा और उपचारों की मदद से इसे कम करने की सलाह देते हैं, क्योंकि अंग्रेजी दवाइयों में क्रिएटनीन लेबल कम करने की कोई भी दवा नहीं है। आयुर्वेद पद्धति से आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा उपचार करने से ही यह जल्द ही लेवल में आ जाता है।

आधुनिक मशीनों द्वारा हो रही अब हमारे केंद्र में थेरेपी, जल्द ही संपर्क करें अब केंद्र पर

विशेष सावधानियां

1. कम करें प्रोटीन का सेवन

पोषक तत्वों में प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन का सेवन क्रिएटिनिन के स्तर को बढ़ा सकता है।

2. ज्यादा से ज्यादा लें फाइबर

फाइबर हमारे पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इससे पाचन बेहतर बना रहता है। शोधकर्ताओं की मानें तो फाइबर का ज्यादा सेवन करने से बढ़े हुए क्रिएटिनिन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। 

3. ज्यादा से ज्यादा पिएं पानी

क्योंकि जरूरत से कम पानी पीने से शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर बढने लगता है!

4. कम कर दें नमक का सेवन

ज्यादा नमक सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर की समस्या हो जाती है। जो सीधा किडनी पर असर करती है।

अल्सर:-


परिचय:

पेट के श्लेष्मकला अस्तर जब क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो उसके कारण अम्लों का जरूरत से ज्यादा स्राव होने लगता है जिसके कारण पेट में अल्सर रोग हो जाता हैं। श्लेष्मा झिल्ली के पेट में क्षतिग्रस्त होने पर गैस्ट्रिक अल्सर तथा डुओडेन क्षतिगस्त होने पर इसे डुओडेनल अल्सर कहते हैं।



अल्सर रोग का लक्षण:-



1. जब किसी व्यक्ति को अल्सर रोग हो जाता है तो रोगी के पेट में जलन तथा पेट में दर्द होने लगता है।

2. अल्सर रोग से पीड़ित व्यक्ति जब भोजन जल्दबाजी में करता है तो उसके कुछ देर बाद उसके पेट में दर्द होना बंद हो जाता है। कभी-कभी भोजन करने के बाद दर्द थोड़ा कम हो जाता है लेकिन फिर भी थोड़ा-थोड़ा दर्द होता रहता है।

3. अल्सर रोग से पीड़ित रोगी जब भोजन करने में जल्दबाजी में करता है या चिंता-फिक्र अधिक करता है या फिर चिकनाई युक्त भोजन करता है तो इस रोग की अवस्था और भी बिगड़ने लगती है।



अल्सर रोग होने का कारण :-



खान-पान सम्बन्धित गलत आदतें तथा भोजन करने का समय सही न होने के कारण अल्सर रोग हो जाता है।
अधिक उत्तेजक पदार्थ युक्त भोजन, तेज मसालेदार भोजन, चाय तथा कॉफी सेवन करने से अल्सर रोग हो सकता है।
शराब पीने, ध्रूमपान करने या तंबाकू का सेवन करने के कारण भी अल्सर रोग हो सकता है।
शारीरिक, भावात्मक या मनोवैज्ञानिक तनाव होने के कारण भी अल्सर रोग व्यक्ति को हो सकता है।



अल्सर रोग का इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा से उपचार:-



अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए तथा इसके बाद इसका इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।


अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले भोजन करने का समय बनाना चाहिए तथा इसके बाद उत्तेजक पदार्थ, मिर्च मसालेदार भोजन, मांसाहारी पदार्थ प्रयोग न करें

आप अनमोल हेल्थ केयर में संपर्क करके अपना उपचार ले सकते हैं

Dr. Haldhar Sir And Team 9098472777

जिंदगी बचाने के अचूक तरीके :

गले में कुछ फँस जाए- तब केवल अपनी भुजाओं को ऊपर उठाएं

एक बच्चे की 56 वर्षीय दादी घर पर टेलीविज़न देखते हुए फल खा रही थी। जब वो अपना सर हिला रही थी तब अचानक एक फल का टुकड़ा उसके गले में फँस गया। उसने अपने सीने को बहुत दबाया पर कुछ भी फायदा नहीं हुआ।

जब बच्चे ने दादी को परेशान देखा तो उसने पूछा कि “दादी माँ क्या आपके गले में कुछ फँस गया है?” वो कुछ भी उत्तर नहीं दे पाई।

“मुझे लगता है कि आपके गले में कुछ फँस गया है। अपने हाथ ऊपर करो, हाथ ऊपर करो” |

दादी माँ ने तुरंत अपने हाथ ऊपर कर दिए और वो जल्द ही फँसे हुए फल के टुकड़े को गले से बाहर थूकने में कामयाब हो गयी।

उसके पोते ने बताया कि ये बात उसने अपने विद्यालय में सीखी है ।सुबह उठते वक्त होने वाले शरीर के दर्द

सुबह उठते वक्त होने वाले शरीर के दर्द

क्या आपको सुबह उठते वक्त शरीर में दर्द होता है? क्या आपको सुबह उठते वक्त गर्दन में दर्द और अकड़न महसूस होती है? यदि आपको ये सब होता है तो आप क्या करें?

तब आप अपने पांव ऊपर उठाएं। अपने पांव के अंगूठे को बाहर की तरफ खेंचे और धीरे धीरे उसकी मालिश करें और घड़ी की दिशा में एवं घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाए ।पांव में आने वाले बॉयटा या ऐठन

पांव में आने वाले बॉयटा या ऐठन

यदि आपके बाएँ पांव में बॉयटा आया है तो अपने दाएँ हाथ को जितना ऊपर उठा सकते हैं उठायें |

यदि ये बॉयटा आपके दाएँ पांव में आया है तो आप अपने बाएँ हाथ को जितना ऊपर ले जा सकते हैं ले जायें। इससे आपको तुरंत आराम आएगा।पांव का सुन्न होना

पांव का सुन्न होना

यदि आपका बायां पांव सुन्न होता है तो अपने दाएं हाथ को जोर से बाहर की ओर झुलायें या झटके दें। यदि आपका दायां पांव सुन्न है तो अपने बाऐं हाथ को जोर से बाहर की ओर झुलायें या झटका दें।आधे शरीर में लकवा

आधे शरीर में लकवा

एक सिलाई की सुई लेकर तुरन्त ही कानों की लोलिका के सबसे नीचे वाले भाग में सुई चुभा कर एक एक बूंद खून निकालें | इससे रोगी को तुरंत आराम आ जायेगा। उस पर से सब पक्षाघात के लक्षण भी मिट जायेंगे।ह्रदय आघात की वजह से हृदय का रुकना

ह्रदय आघात की वजह से हृदय का रुकना

ऐसे व्यक्ति के पांव से जुराबें उतार कर (यदि पहनी है तो) सुई से उसकी दसों पांव की उंगलियों में सुई चुभो कर एक एक बूंद रक्त की निकालें | इससे रोगी तुरन्त उठ जाएगा।यदि रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो

यदि रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो

चाहे ये दमा से हो या ध्वनि तंत्र की सूजन की वजह या और कोई कारण हो, जब तक कि रोगी का चेहरा सांस न ले पाने की वजह से लाल हो उसके नासिका के अग्रभाग पर सुई से छिद्र कर दो बून्द काला रक्त निकाल दें |

उपरोक्त सभी तरीकों से कोई खतरा नहीं है और ये केवल 10 सेकेंड में ही किये जा सकते हैं ।

आप सभी से निवेदन है,कि इस मैसेज को सुरक्षित (Save) करके रखलें…
आपातकाल (Emergency) मे काम आयेगा।
किसी की जान बचा सकते हो

यह समस्या मानव शरीर की सबसे लंबी नस सियाटिक से जुड़ी है। इसे सियाटिक नर्व भी कहा जाता है। सायटिका पीठ में दर्द की एक ऐसी स्थिति को कहते हैं। जो सियाटिक नर्व के दब जाने से पैदा होती है।

यह नर्व पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर पैरों के अंगूठे तक पहुचती है। यह नश हमारी मांस पेशियों को शक्ति देने का काम करती है और इसी की वजह से हमे संवेदना महसुस होती है।

अगर किसी वजह से यह नर्व दब जाती है तो यह आस पास की दूसरी नसों को भी दबाने लगती है। इसी वजह से व्यक्ति को कमर , पीठ , हिप्स और पैरों में लगातार दर्द की समस्या होती है। जिसे सायटिका कहा जाता है। इसके अलावा अगर स्पाइनल कॉर्ड का निचला हिस्सा संकरा हो तो भी ऐसी समस्या हो सकती है।

अगर रीढ़ की हड्डियों के जोड़ो के बीच मौजूद कुशन का जेलनुमा पदार्थ सूखने लगे तो हड्डियां एक दूसरे पर ज्यादा दबाव डालने लगती है। इस वजह से भी ऐसी समस्या हो सकती है।


कैसे करे पहचान :-


1 कमर , पीठ या पैरो में तेज दर्द।

2  दर्द के साथ जलन और चुभन 

3  कमजोरी महसूस होना।

4  पैरो का सुन्न पड़ जाना , कदम उठाते वक्त पैरो या एड़ियो में दर्द।

5  खड़े होने या बैठने पर दर्द का बढ़ जाना।

6  पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर दर्द का पैरों के अंगूठे तक पहुँच जाना।


क्या है वजह :-


1   भारी वजन उठाने या किसी वजह से झटका लगने पर रीढ़ की  हड्डी का कोई खास हिस्सा अपनी जगह से खिसक जाता है। जिसे स्लिप डिस्क कहा जाता है।यह सायटिका का सबसे बड़ा कारण है।

2  हमेशा हाई हील पहनने वाली स्त्रियों को यह समस्या हो सकती है।

3  ओवर वेट् लोगो को भी यह समस्या हो जाती है।

4  डिलीवरी के बाद कुछ स्त्रियों को यह समस्या हो जाती है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान सियाटिक नर्व पेल्विक एरिया पर दबाव डालता है।

5   नियमित रूप से एक्सरसाइज न करना , गलत ढंग से किया गया व्यायाम और सोने के लिए बहुत ज्यादा मुलायम गद्दे का उपयोग भी इसका कारण हो सकता है।


बचाव के तरीके :-


1  सन्तुलित खान पान और नियमित एक्सरसाइज से अपना वजन नियंत्रित रखें।

2   कोई भी भारी सामान उठाते समय ध्यान रखे कि कमर पर ज्यादा जोर न पड़े।

3   बैठते समय हमेशा अपनी पीठ सीधी रखें।

4   उठते बैठते समय ध्यान रखे कि आपकी कमर को झटका न लगे ।

5   प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलिवरी के बाद डॉक्टर के सभी निर्देशों  का अच्छी तरह पालन करें।

6  कुशल प्रशिक्षक की सलाह और निगरानी के बिना कोई भी एक्सरसाइज न करें।


उपचार :- हर्बल मेडिसिन इलेक्ट्रोहोम्योपैथी और थेरेपी की सहायता से सायटिका को ठीक किया जा सकता है।

जटिल एव आसाध्य रोगों का वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति द्वारा उपचार

संपर्क –
डॉ हलधर पटेल
संतोषी नगर, रिंग रोड न.1 रायपुर
9098472777

जांच & उपचार के लिए यहाँ टच करके फॉर्म भरिये

ये आधुनिक मशीने है जो अलग अलग शारीरिक परेशानियों में काम मे आते हैं। इनका मुख्य काम थेरेपी का होता है।

इन मशीनों द्वारा शरीर के मांस पेशियों को थेरेपी के माध्यम से आराम दिया जाता है। लम्बे समय से चली आ रही असहनीय दर्द को इन मशीनों के माध्यम से थेरेपी दे कर आराम दिया जाता है।

चाहे कितना भी पुराना दर्द हो थेरेपी के माध्यम से ठीक किया जाता है।

इसमें

RHEUMATISM

GOUT

JOINT PAIN

KNEE JOINT PAIN

ARTHRITIS

SPONDYLOSIS

LUMBER SPONDOLOSIS

CERVICAL SPONDOLOSIS

PARALYSIS

NERVE WEAKNESS

MUSCULAR SPASM

आदि परेशानियों को थेरेपी के माध्यम से ठीक किया जाता है

टेस्ट और जांच के लिये यहां टच करके पंजीयन करे

संपर्क –
डॉ हलधर पटेल
संतोषी नगर, रिंग रोड न.1 रायपुर
9098472777

COMMON NAME – ICELANDIC MOSS

FAMILY NAME – PERMELIACEAE

AVAILABILITY –

INDONESIA

SOUTH & NORTH AFRICA

EUROPE

PROPERTIES

FOREIGN BODY REMOVER

ALL TYPES OF WORM INFESTETION

SWELLING OF INTESTINE

COUGH

COLD

FEVER

INFLUENZA / ACUTE CORYZA

DIARRHOEA / DYSENTERY / CHOLERA

WEAKNESS DUE TO NOT ASSIMILATION OF PROPER NUTRITION & PROTEIN SUPPLIMENT

ANY TYPE OF VITAL FATIGUE

Essence Of 38 EH Medicine Available Call – 9098472777

For emergency cases        +91-9098472777